शहर की बात करें तो आधिकारिक रूप से 1893 में शहर को नगर पालिका का दर्जा मिला। इसके बाद करीब 100 वर्ष तक यह नगर पालिका ही रही। इसको नगर निगम बनाने का श्रेय 1995 में उत्तर
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को जाता है। इस सफर में 25 अंग्रेज शासक रहे। इसके बाद नगर पालिका बनने पर सर्वाधिक मुस्लिमों ने कमान संभाली है। वहीं महिलाओं की बात करें तो
अब तक सिर्फ दो बार कमान महिलाओं ने संभाली है।
नगरीय प्रशासन की ये भी खास बातें
- पहला बिजली का खंभा मोहल्ला जयगंज में लगाया गया था
- थानों के बाहर घोड़ों को पानी पिलाने वाली हौदियां बनी थीं
- तालों के व्यापार का बड़ा केंद्र था, तब सराय संख्या 84 थी
- शहर को सिविल लाइंस से जोडऩे को कठपुला पहला पुल
- तांगे लोकल ट्रांसपोर्ट का साधन, तांगा स्टैंड अभी भी मौजूद
बदलाव ये भी
किसी जमाने में शहर की सड़कों पर उड़ती धूल को दबाने के लिए पीठ पर मशक लादकर भिश्तियों द्वारा छिड़काव किया जाता था। करीब तीन दशक पहले मशक का चलन बंद हो गया और आज
स्प्रिंकलर नामक मशीन से छिड़काव होता है। इसी तरह शहर में विद्युतीकरण को भूमिगत करने की तैयारी है।
नगर पालिका से नगर निगम तक
- 1893 में पहली बार शहर नगर पालिका बना, जेएम हैरिसन मनोनीत प्रशासक बने।
- 1 जून 1921 को अब्दुल समद खां अध्यक्ष बने
- 1923 में एम ख्वाजा दूसरे अध्यक्ष बने
- 1925 में सोहन लाल बीए अध्यक्ष बने
- 1931 में अब्दुल खालिक अध्यक्ष बने
- 1940 में शिव प्रसाद अध्यक्ष बने
- 1940 में ही अब्दुल मजीद ख्वाजा अध्यक्ष बने
- 1945 में एलएन माथुर अध्यक्ष बने
- 1945 में ही अब्दुल मुफीद खां शेरवानी अध्यक्ष
- 1952 में सुपरसीट होकर प्रशासन ने कार्य संभाला
- 1988 तक प्रशासकों ने ही बोर्ड चलाया
- 1988 में ओपी अग्रवाल अध्यक्ष बने
- 1995 में अलीगढ़ को नगर निगम का दर्जा
- 1996 में आशुतोष वाष्र्णेय मेयर बने
- 2002 में सावित्री वाष्र्णेय महापौर बनीं
- 2007 में आशुतोष वाष्र्णेय फिर महापौर बने
- 2012 में शकुंतला भारती महापौर बनीं
- 2017 में मो.फुरकान मेयर बने