अवैध संबंधों में बाधक पति की हत्या में पत्नी, उसके प्रेमी सहित तीन दोषियों को अदालत ने उम्रकैद व जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला जज डॉ. बब्बू सारंग की अदालत से दस वर्ष पुराने अतरौली के मुकदमे में सुनाया गया है। खास बात यह है कि जिस व्यक्ति की हत्या हुई थी, उसके शव की पहचान फोटो के आधार पर परिजन तीन माह बाद कर पाए थे, तब मुकदमे में गिरफ्तारी आदि कार्रवाई हुई थी।
अभियोजन अधिवक्ता डीजीसी फौजदारी धीरेंद्र सिंह तोमर के अनुसार, घटना 11 दिसंबर 2012 की है, जब अतरौली क्षेत्र के गांव औरेनी दलपतपुर के खेत व नहर के बीच बनी नाली में 45 वर्षीय व्यक्ति का शव मिला था। ग्राम चौकीदार वीरपाल की तहरीर पर अज्ञात में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे में विवेचक ने शव की पहचान न हो पाने पर अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी।
9 मार्च 2013 को बुलंदशहर के पहासू देहात के गांव नगला रूद के वेदप्रकाश ने पहासू थाने के सूचना पट पर अपने भाई जयप्रकाश के शव का फोटो पंफलेट चिपका देखा तो पुलिस को बताया कि यह उसके भाई का फोटो है। इसके बाद वेदप्रकाश ने अतरौली पुलिस को अपने भाई की हत्या के संबंध में लिखित तहरीर दी।
तहरीर के अनुसार, जयप्रकाश की पत्नी सर्वेश का मायका मैंडू, हाथरस में है और उसकी एक बहन फजलपुर बरला में रहती है। फजलपुर के ही ओंकारी का जयप्रकाश के घर आना-जाना था। आरोप है कि ओंकारी व सर्वेश में संबंध थे, जिसका जयप्रकाश विरोध करता था।
इसी क्रम में साजिश रचकर घटना वाले दिन सर्वेश अपने पति को रुपये दिलाने के बहाने गांव से फजलपुर लेकर आई, जहां उसे अतरौली में व औरेनी दलपतपुर वाले रास्ते पर कुछ परिचितों ने देखा। आरोप है कि सर्वेश ने ओंकारी व अपने साथी फजलपुर के यशपाल सिंह संग मिलकर हत्या कर शव फेंक दिया है। घटना के बाद सर्वेश गांव पहुंच गई और कहा कि जयप्रकाश नौकरी के लिए दिल्ली चला गया है।
इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने फिर विवेचना शुरू की और साक्ष्यों व गवाही के आधार पर तीनों को जेल भेज दिया। चार्जशीट के आधार पर न्यायालय में ट्रायल शुरू हुआ। सत्र परीक्षण के दौरान साक्ष्यों व गवाही अदालत ने तीनों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद व 35-35 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।