अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले बृहस्पतिवार को तालानगरी स्थित कार्यालय में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें ‘आजादी के क्या मायने हैं’ विषय पर युवाओं ने कहा कि यूं तो 15 अगस्त 1947 में देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिल गई थी, लेकिन अभी भी भ्रष्टाचार, भेदभाव, ऊंच-नीच सरीखे कुप्रथाओं से आजादी मिलना बाकी है।
अगर इनसे देश को छुटकारा मिल गया तो जान लीजिए, देश फिर से सोने की चिड़िया कहलाने लगेगा। छात्र नेता रहे रंजीत चौधरी ने कहा कि तिरंगा हमारी आन-बान-शान है। आजादी की खुशी मनाते समय उन जाने-अनजाने वीर सपूतों को भी याद करना चाहिए, जिन्होंने देश के लिए जान दे दी।
जिस तरह चिकित्सा, इंजीनियरिंग, वकालत, पत्रकारिता, शिक्षण सहित अन्य क्षेत्रों में संबंधित डिग्री की जरूरत होती है, वैसे ही ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर लोकसभा सदस्य पद का चुनाव लड़ने वाले के लिए भी शैक्षिक अर्हता होनी चाहिए।
किसान नेता सुनील चौधरी ने कहा कृषि प्रधान देश होने के बाद भी किसान परेशान है। चीन के उत्पाद भारत में पकड़ बना चुके हैं, जो भविष्य के लिए ठीक नहीं है। सरकार को इसके लिए नीति बनानी होगी। अलीगढ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष आमिर आबिद ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी देश के कई गांव ऐसे हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है। हिंदू-मुस्लिम के बजाय हम हिंदुस्तानी हो गए तो कोई भी आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता है।
जाट वंशावली के युवा जिलाध्यक्ष अमित चौधरी ने कहा कि देश से भ्रष्टाचार का खात्मा होना चाहिए। छात्र नेता मोहसिन मेवाती ने कहा कि उनकी नजर में आजादी के मायने तब हैं, जब हर कोई खुश नजर आए। अमन चौधरी ने कहा कि स्वतंत्र देश में गुणात्मक शिक्षा पर जोर होना चाहिए।
इन्होंने भी रखे विचार
प्रदीप चौधरी, सपेरा भानपुर के प्रधान आदेश कुमार, सोनू, सतेंद्र मिश्रा, जगदीश पंडित ने भी विचार व्यक्त किए।