अलीगढ़। देश कान्हा का जन्मोत्सव मना रहा है। ये जगजाहिर है कि कान्हा का जन्म उनके मामा कंस की मथुरा जेल में हुआ था, मगर ये शायद ही लोग जानते होंगे कि मथुरा की जेल में जो ताले प्रयोग होते थे। उस पैटर्न का ताला आज भी अलीगढ़ की इकलौती ताला फैक्टरी में तैयार होता है।
खास बात यह है कि तकनीक के युग में जेलों में आज भी हाथ से बनने वाले उसी पैड लॉक की डिमांड है, जो मान्यता के अनुसार, उन दिनों मथुरा की जेल में लगा करते थे। समय के साथ उसका स्वरूप बेशक बदल गया है, मगर बनाने का तरीका और प्रकार आज तक नहीं बदला।
महानगर के कनवरीगंज छिपैटी में कई पीढ़ी से इस कारोबार को संभाल रहे विकास जैन बताते हैं कि उनके दादा रोशनलाल जैन ने 1917 में हाथ से बनने वाले ताले जेलों व अन्य सरकारी संस्थानों में आपूर्ति के लिए बनाना शुरू किया। बाद में पिता ओमप्रकाश जैन ने कारोबार संभाला और अब वह खुद संभाल रहे हैं।
विकास जैन बताते हैं कि समय के साथ कारीगरों की कमी होने लगी है। दो दशक पहले तक जिले के बुलंदशहर बॉर्डर के कुछ गांवों में इनके कारीगरों की भरमार थी। बताते हैं कि हिमाचल प्रदेश की जेल में पीतल वाले और अन्य प्रांतों की जेल में आज भी लोहे वाले तालों की आपूर्ति होती है। एक किलो वजन वाले लोहे के ताले की औसत कीमत 500 रुपये व पीतल के ताले की 2000 रुपये तक पड़ती है।
देश के कई राज्यों में मिला इस फर्म को सम्मान
जैन लॉक्स के नाम से मशहूर यह फर्म किसी जमाने में डीजीएसएमडी रेट कंट्रोल होल्डर के रूप में पंजीकृत थी। विकास जैन ने उनकी फर्म को 1923 से लेकर अब तक मिले अनगिनत राज्यों के सम्मान दिखाए। भूटान, करांची, सिलांग, बड़ौदा रियासत सहित तमाम जगह से उन्हें सम्मान मिला है।
मशीन नहीं कर सकती ये काम
विकास बताते हैं कि जेल और कोषागार में लगने वाले इन तालों को बनाने की जो प्रक्रिया है, उसे मशीन से नहीं बनाया जा सकता। मशीन में जो कटिंग छेद किए जाते हैं, वह हाथ से ही हो सकते हैं। दूसरी बात ये है कि इसकी मशीन पीतल की होती है, इसलिए लंबे समय तक चलती है। आईएस मानक 15275/2003 ने भी इसी ताले को मान्यता दे रखी है।
विदेशों में भी है मांग
उनके यहां से विदेशी इन तालों को लेकर जाते हैं, जिन्हें वहां एंटीक उत्पाद के रूप में पेश किया जाता है। उसी अनुसार डिमांड भी आती है।
खास बातें---
1971 से संचालित हो रही शहर में यह ताला फैक्टरी
1 किलो वजनी ताला जेलों में है सर्वाधिक डिमांड में
देश के सभी राज्यों की जेलों में होती है इनकी सप्लाई
आईएस मानक के अनुसार ही तैयार होता है यह ताला
5 ताले एक दिन में बनकर हो पाते हैं यहां पर तैयार
20 से 25 हजार तालों की प्रति वर्ष सप्लाई होती है
ये भी खास तथ्य
- जीआई पैड लॉक : मशीन पीतल की और बॉडी लोहे की होती है।
- बीएसआई पैड लॉक : मशीन भी पीतल और बॉडी भी पीतल की।
- पीतल की बॉडी वाले ताले में नहीं दिखाई देता है कोई भी जोड़।