मडराक पुलिस ने सोने से ज्यादा कीमती मेटल डस्ट के लिए ईको वैन के साइलेंसर चोरी करने वाले गिरोह के तीन सदस्य गिरफ्तार किए हैं। इनके कब्जे से 11 साइलेंसर बरामद हुए हैं। पूछताछ में इन लोगों ने स्वीकार किया है कि ये साइलेंसर चोरी कर तालानगरी की एक फैक्टरी में बेचते थे। फैक्टरी संचालक उसमें से मेटल डस्ट निकालकर गैर प्रांतों में सप्लाई करता है। पुलिस अब फैक्टरी संचालक की गिरफ्तारी के लिए प्रयासरत है।
सीओ इगलास राघवेंद्र सिंह के अनुसार, ईको वाहन से साइलेंसर चोरी करने वाले गिरोह के विषय में मिली सूचना पर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने अपने नाम बाजपुर सहसवान बदायूं का मुसाहिद अली, नरूपुरा पालीमुकीमपुर का नासिर अली व मानिक चंद्र बताए हैं।
पूछताछ में बताया कि नरूपुरा के मो. उमर की ताला नगरी में फैक्टरी है। वही इन साइलेंसरों को ले जाकर बेचता है। उमर के जरिये साइलेंसर से मेटल डस्ट निकालकर बाहर भेजी जाती है। इन लोगों पर पहले से चोरी आदि के सात मुकदमे दर्ज हैं। सीओ ने बताया कि मो.उमर को मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। उसकी गिरफ्तारी होगी। इसके अलावा इस गिरोह से जुड़ी अन्य कड़ियों को भी देखा जा रहा है।
थाने बुलाकर क्यों छोड़ा फैक्टरी स्वामी?
इस मामले में मडराक पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार पुलिस ने तीनों चोरों के जरिये जब फैक्टरी स्वामी के विषय में जानकारी की तो उसे भी थाने बुलाया गया। मगर रात में उसे छोड़ दिया गया। इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सीओ इगलास का कहना है कि रात में उमर को मुकदमे में आरोपी बनाया है। पकड़ा जाएगा। रात में उसने गलत तथ्य पुलिस के सामने पेश किए। बाकी मडराक पुलिस की भूमिका की जांच भी होगी।
इसलिए खास है साइलेंसर
तकनीकी जानकारों के अनुसार ईको वैन के साइलेंसर में कैटेलिक कन्वर्टर होता है और यह प्लेटिनम ग्रुप ऑफ मेटल्स (पीजीएम) से बनता है। चलते-चलते इसके अंदर विशेष मेटल डस्ट एकत्र होती है, जो भारतीय बाजार में 3 से 6 हजार रुपये प्रति दस ग्राम और विदेशी बाजार में 10 हजार रुपये तक प्रति दस ग्राम बिकती है। इस मेटल डस्ट का हरियाणा के सोनीपत, गुजरात के अहमदाबाद, सूरत की फैक्टरियों में प्रयोग में होता है। वहीं इसकी सप्लाई होती है।