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Aligarh News: हत्याकांडों से कांप चुकी है अलीगढ़ कचहरी, सात बार में हुई हैं 11 हत्याएं

Thu, 08 Jun 2023 01:35 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ दीवानी में अगर पुराने अपराध पर गौर करें तो सात बार में ग्यारह हत्याएं हुई हैं। इसमें एक हत्या दीवानी के बाहर गेट से निकलते समय रायल रेजीडेंसी होटल के स्वामी की हुई। बाकी सभी दीवानी के अंदर हुई हैं।
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दीवानी कचहरी का गेट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश की राजधानी लखनऊ की कचहरी में बुधवार को पश्चिमी यूपी के कुख्यात गैंगस्टर संजीव उर्फ जीवा की हत्या ने एक बार फिर न्यायिक परिसरों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा किया है। हालांकि यहां कचहरी की सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम का दावा पुलिस स्तर से होता रहता है, मगर यहां भी कई बार ऐसे हत्याकांड हुए हैं, जिनसे कचहरी कांप उठी है। अनगिनत बार गोली कांड हुए हैं। 2014 में हुए गोलीकांड के बाद से यहां खासे सुरक्षा इंतजाम का दावा किया जाता है। बावजूद इसके लोग बिना किसी जांच पड़ताल के गेट नंबर एक से प्रवेश करते हैं, जिससे किसी भी दिन सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो सकता है।

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दीवानी परिसर में आखिरी सबसे चर्चित घटना 2014 में हुई। जब इगलास के कुख्यात अपराधी अरुण उर्फ समीर जाट को जेल से पेशी पर लाया गया। इसी दौरान उसकी प्रेमिका दीवानी में पिस्टल लेकर पहुंची और खाना खाते समय उसने समीर जाट को पिस्टल थमा दी। उस पिस्टल से खुद ही सुरक्षा में लगे सिपाहियों पर फायरिंग कर समीर अपने साथ एक अन्य अपराधी को लेकर भाग गया। कुछ दिन बाद ही समीर मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। मगर, उसके साथ भागे मूल रूप से लोधा हाल निवासी नलकूप कालोनी बन्नादेवी के अजीत उर्फ बंटी का आज तक पुलिस सुराग नहीं तलाश पाई।

इस घटना के बाद दीवानी के सभी गेटों पर मैटल डिटेक्टर लगे। दीवानी परिसर में सीसीटीवी लगवाए गए। कुछ वर्ष पहले गेट नंबर दो पर लगेज स्कैनर भी लगवा दिया गया। दीवानी में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। इस घटना के बाद तय किया गया कि किस गेट से कौन प्रवेश करेगा। गेट नंबर एक से वादकारियों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इस गेट से बिना किसी रोकटोक व चेकिंग के वादकारी प्रवेश करते हैं, जो किसी भी दिन किसी बड़ी घटना का कारण बन सकता है।
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सात बार में हुई हैं ग्यारह हत्याएं
दीवानी में अगर पुराने अपराध पर गौर करें तो सात बार में ग्यारह हत्याएं हुई हैं। इसमें एक हत्या दीवानी के बाहर गेट से निकलते समय रायल रेजीडेंसी होटल के स्वामी की हुई। बाकी सभी दीवानी के अंदर हुई हैं। सबसे पहले लोधा के गांव ल्हौसरा की रंजिश में अभिरक्षा में तीन लोगों की हत्या हुई। फिर दो पक्षों के गोली कांड में तीन जान गईं। यह दो कांड सबसे चर्चित रहे। सबसे आखिरी हत्या टप्पल के बाजौता की चर्चित रंजिश में होशियार सिंह की हुई। इसमें बलराज भाटी द्वारा सुपारी लिया जाना उजागर हुआ। वहीं गोली कांड तो अनगिनत बार हुए हैं। जिनमें रॉबी-कालू, सुरेंद्र-अजय आदि के बीच फायरिंग सबसे चर्चित है। आखिरी बार फायरिंग अरुण उर्फ समीर जाट द्वारा की गई।

दीवानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। यह तय है कि कौन किस गेट से जाना है। चेकिंग के लिए मैटल डिटेक्टर व लगेज स्कैनर लगे हुए हैं। समय समय पर चेकिंग अधिकारियों के स्तर से भी होती है। दिन में पुलिस ड्यूटी व रात में गारद ड्यूटी रहती है। दीवानी अधिकारियों के साथ प्रतिमाह बैठक में समीक्षा भी होती है। फिर भी अगर कहीं कोई अनदेखी है तो उस पर सख्ती की जाएगी।-कुलदीप सिंह गुणावत, एसपी सिटी

ये हैं चर्चित हत्याकांड

  • 1984 में ल्हौसरा की रंजिश में दीवानी में ही अभिरक्षा में तीन लोगों की हत्या
  • 1991 में कचहरी कांड में दो गुटों में गवाही के दौरान फायरिंग, तीन की मौत
  • 1995 में बुलंदशहर के बझेड़ा की रंजिश में गवाही देने आए सुशील की हत्या
  • 2000 में बुढ़ासी के आस मोहम्मद नाम के व्यक्ति की दवानी के अंदर ही हत्या
  • 2001 में दीवानी के अंदर ही पालीमुकीमपुर बड़ेसरा के सतवीर सिंह की हत्या
  • 2008 में दीवानी के बाहर जमीनी विवाद में राॅयल रेजीडेंसी के स्वामी की हत्या
  • 2013 में टप्पल बाजौता की रंजिश में अभिरक्षा में चर्चित होशियार की हत्या
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