स्टेशन पर ट्रेन करीब एक घंटे तक खड़ी रही। कोच की साफ-सफाई के बाद ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया। रेलवे, आरपीएफ एवं जीआरपी की टीमों ने संयुक्त जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है। घटना की सूचना पाकर दिल्ली में रहने वाले हरिकेश के रिश्ते के साढू पवन कुमार आ गए। उन्होंने इस मामले में रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ लापरवाही एवं गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
रेलवे के इतिहास में अपने किस्म का पहला हादसा
हादसे के बाद अलीगढ़ में तैनात रेलवे अफसरों ने बताया कि उनकी जानकारी अपने किस्म का यह पहला हादसा है। सभी हैरत जता रहे थे कि कैसे एक लोहे की रॉड (लगभग 5 फीट, वजन 6.6 किग्रा) चलती ट्रेन में शीशा तोड़कर घुसी और यात्री के दाहिने तरफ कान और गर्दन के नीचे से निकलकर प्लाई बोर्ड को पार करते हुए दूसरे केबिन की तरफ निकल गयी।
दिल्ली में मोबाइल कंपनी में तकनीशियन पद पर तैनात थे हरिकेश दुबे
यात्री की पहचान जेब में मिले दस्तावेजों के आधार पर उनकी पहचान हरिकेश दुबे पुत्र संतराम दुबे, निवासी गोपीनाथपुर, थाना चांदा, जनपद सुल्तानपुर के रूप में हुई। वह दिल्ली में मोबाइल टॉवर से जुड़ी एक कंपनी में तकनीशियन के पद पर तैनात था। आनंद विहार स्टेशन पर ट्रेन में सवार हरिकेश लखनऊ जा रहे थे। वह जनरल कोच के दूसरे केबिन की सीट नंबर 15 पर यात्रा कर रहे थे।
प्रकरण में रेलवे, आरपीएफ, जीआरपी की संयुक्त टीम गठित की गई है। जिसकी जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी रेलवे कर्मियों पर कार्रवाई तय की जाएगी। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर-मध्य रेलवे, प्रयागराज मंडल।