शहर के बीचोबीच स्थित बाबा भोलेनाथ का अचलेश्वर धाम मंदिर सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। भगवान शिव यहां शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। मान्यता हैं कि यह धाम दिव्य है। जहां भक्तों के बिगड़े काम बनते हैं। यह मंदिर टीके के रूप में विकसित था, करीब 500 वर्ष पूर्व यह शिवलिंग जमीन से निकला था। मंदिर के निकट ही विशाल अचल सरोवर भी है। यहां द्वापर युग में युधिष्ठिर के दोनों छोटे भाई नकुल और सहदेव के स्नान करने की भी धारणाएं हैं। इसके बाद से इस स्थान की मान्यता बढ़ती चली गई। अचल ताल के चारों ओर धीरे - धीरे मंदिर स्थापित होते गए। इसलिए इस स्थान को मंदिरों का नगर भी कहा जाता है।
जीटी रोड पर अचल ताल स्थित अचलेश्वर धाम मंदिर सावन माह प्रारंभ होते ही हर-हर बम-बम के जयकारों से गूंज उठता है। बताते है कि जमीन से निकले शिवलिंग को लोगों ने किसी अन्य स्थान पर स्थापित करने की कोशिश की, मगर जितना खोदते जाते, शिवलिंग उतने ही अंदर जाते गए । अंत में लोग थक-हार गए और उन्हें महसूस हुआ कि यह कोई दैवीय शक्ति है। इसके बाद वहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई।
मराठों ने बनाया था यह मंदिर
पुजारी राजू गोस्वामी बताते हैं कि मराठों ने करीब 500 साल पहले इस मंदिर को भव्य रूप दिया था। द्वापर युग में अज्ञातवास के समय नकुल और सहदेव ने मंदिर के निकट सरोवर में स्नान किया था। उसके बाद यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बनता चला गया। वैसे तो प्रत्येक सोमवार को यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है, मगर सावन में तो प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त बाबा अचलेश्वरधाम के दर्शन करने आते हैं। शिवलिंग पर जलाभिषेक के साथ ही बेलपत्र, दूब, धतूरा आदि अर्पित करते हैं। राजू गोस्वामी बताते हैं कि अचलेश्वर धाम बाबा के नाम से ही अचल ताल भी प्रसिद्ध हो गया, क्योंकि सैकड़ों साल से बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने भक्त आया करते थे। इसलिए मंदिर के चारों तरफ छोटे-छोटे मंदिर स्थापित होने लगे। भगवान श्रीकृष्ण, बलराम, माता दुर्गा, शिव- पार्वती, नौ देवी आदि देवी-देवताओं के मंदिर यहां स्थापित हैं। बड़ी संख्या में भक्त अचल ताल की परिक्रमा लगाते हैं। ऐसी मान्यता है कि परिक्रमा लगाने से भक्तों की मनोकामना जरूर पूर्ण होती है।
आस्था की लगती थी डुबकी
अचल ताल में आज से करीब 40-50 वर्ष पहले हरदुआगंज से पाइप लाइन के माध्यम से गंगा का पानी आता था। धीरे -धीरे शहर बढ़ता चला गया और नहर बंद हो गई। पहले गंगा जल आने से यहां बड़ी संख्या में लोग स्नान भी करते थे। ताल के किनारे बच्चों के मुंडन संस्कार आदि भी संपन्न कराए जाते थे।
भव्य बन रहा अचल ताल
स्मार्ट सिटी के तहत अचल ताल का भव्य निर्माण हो रहा है ।भगवान भोलेनाथ की विशाल प्रतिमा अचल ताल में विराजमान हैं। चारों तरफ फुटपाथ बनाया जा रहा है। यह हरियाली से भी भरपूर रहेगा। इससे आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ जाएगी।
भक्तों के बोल ...
अचलेश्वर धाम बाबा के दर्शन करने मात्र से ही जीवन धन्य हो जाता है। बाबा की भक्तों पर बड़ी कृपा है। मैं प्रतिदिन अचलेश्वर धाम के दर्शन करने आता हूं।
- मुकेश माहेश्वरी, गांधी नगर
शहर के मध्य में भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। शिव भक्तों पर बड़ी कृपा है। चारों तरफ मंदिर होने से यह स्थान तीर्थ स्थल के रूप में दिखाई देता है। इससे मन और पवित्र हो जाता है।
- विष्णु कुमार, दही वाली गली