एक नगाइच, दो धर्मों की मान्यताओं से अंतिम संस्कार

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अमर उजाला ब्‍यूूराे

A Nagaich, funeral from the beliefs of two religionsPC: Amar Ujala

महेश नगाइच से अब्दुल्ला बनने के करीब 30 साल बाद जब जिंदगी ने साथ छोड़ा तो एक नहीं दोनों धर्मों के लोगों ने बारी-बारी अपने रीति रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। मुस्लिम समाज ने मंगलवार को शव को सुपुर्द ए खाक किया तो वहीं बुधवार को परिवार कुश की अर्थी श्मशान घाट ले गया, जहां पुत्र ने कुश के बने प्रतीकात्मक शव को मुखाग्नि देने के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। बताते चलें कि कस्बे के मोहल्ला नगाइचपाड़ा निवासी महेश नगाइच ने तीस साल पहले हिंदू धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपना लिया था। इसके बाद वह अब्दुल्ला नगाइच के नाम से पुकारे जाने लगे। बीते मंगलवार को उनकी मौत हो गई थी। हालांकि अब्दुल्ला नगाइच की पत्नी प्रेमलता, बेटे सोमेश व तीनों बेटियां हिंदू धर्म में ही रहीं। इस मामले में तब तूल पकड़ा था जब उन्होंने कुछ स्थानीय लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी थी। उनका कहना था कि उनकी पत्नी व बच्चों को इस्लाम अपनाने से रोका गया। दूसरी ओर पत्नी और बच्चों ने अदालत में बयान दिया कि वे स्वेच्छा से हिंदू धर्म में ही रहेंगे।  पिंडदान किया, शुक्रवार को अस्थि विसर्जन बुधवार को अब्दुल्ला उर्फ महेश नगाइच के कुश के बने प्रतीकात्मक शव को बेटे सोमेश ने मुखाग्नि दी। पिंड दान, बाल दान आदि रीति रिवाज अपनाए गए। कुश की अर्थी पर ही परिजनों ने मातम किया। 13 दिन बाद अरिष्टी (तेरहवीं संस्कार) होगा। शुक्रवार को गंगा में अस्थि विसर्जन की रस्म पूरी की जाएगी। दिल्ली में अपनाया था इस्लाम महेश नगाइच दिल्ली में एक खाद कंपनी में नौकरी करते थे। वह जामा मस्जिद के पास रहते थे। तीस साल पहले वह कुछ मुस्लिम लोगों के संपर्क में आए और हिंदू धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपना लिया। पत्नी और बच्चों के साथ न आने पर उन्होंने घर छोड़ अतरौली के ही मुस्लिम बहुल इलाके में किराये के मकान में रहने लगे। गुजारे के लिए वे इस्लाम से संबंधित धार्मिक पुस्तकें बेचते थे।  
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