अलीगढ़। निकाय चुनाव में भाजपा का परचम लहराने से सपा में बेचैनी बढ़ गई है। अब ‘शक्ति संतुलन’ के लिए सपा पुराना दांव चलने की तैयारी कर रही है ताकि नगर निगमों में प्रभुत्व बरकरार रखा जा सके। नगर विकास विभाग के सचिव ने इस संबंध में प्रशासन को पत्र लिख कर पूरी जानकारी मांगी है। इससे पहले बसपा शासनकाल में डिप्टी मेयर का पद खत्म कर दिया गया था। अलीगढ़ नगर निगम में मेयर आशुतोष वार्ष्णेय के कार्यकाल में मुकेश उपाध्याय मांची आखिरी डिप्टी मेयर रहे थे। सबसे पहले बसपाई भगवान देवी और इसके बाद भाजपाई सुश्री पुष्पलता शर्मा एडवोकेट भी डिप्टी मेयर रह चुकीं हैं। अलीगढ़ में अब तक तीन डिप्टी मेयर ही रहे हैं। नगर विकास सचिव ने यह भी पूछा है कि नगर निगम में कितने पार्षद नामित करने का विधान है? इसका तरीका क्या है? नगर निगम में प्रदेश सरकार अधिकतम दस पार्षद नामित करने का विधान है। अनुमान लगाया जा रहा है कि नामित पार्षद सपाई खेमे से ही हाेंगे। नामित पार्षदों और कुछ अन्य पार्षदों को मिला कर सपा डिप्टी मेयर का पद हथियाने की पूरी जुगाड़ लगाएगी। डिप्टी मेयर के लिए फैसला सितंबर तक सामने आ जाएगा। डिप्टी मेयर का पद किसी चुने गए पार्षद को ही मिल सकता है।