अलीगढ़। एचआईवी से पीड़ित होने के बाद भी युवाओं में जिंदगी का जज्बा कम नहीं हो रहा है। इस जानलेवा बीमारी से लड़ते हुए भी वह गृहस्थी बसाने के ख्वाहिशमंद हैं। शादी के लिए एचआईवी पीड़ित अपनी जाति से कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं। उन्हें जोड़ीदार सजातीय ही चाहिए। हाल ही में अलीगढ़ के स्वैच्छिक जांच एवं परामर्श केंद्र के स्तर से एक सजातीय जोड़ा दांपत्य सूत्र में बंधा है। इसके बाद तो परामर्श केंद्र पर शादी के लिए युवाओं की लाइन लगी है, लेकिन ज्यादातर युवा अपनी बिरादरी की ही दुल्हन मांग रहे हैं। एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत नाको (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) के स्तर से मलखान सिंह जिला अस्पताल में स्वैच्छिक जांच एवं परामर्श केंद्र का संचालन होता है। जब से यह केंद्र बना है तब से जावित्री देवी संविदा पर काउंसलर की बखूबी जिम्मेदारी निभा रही हैं। जावित्री का कहना है कि एचआईवी पीड़ित युवक व युवतियां उनसे काफी घुल मिल जाते हैं। रात हो या दिन, यदि कोई परेशानी है तो वह फोन करके पूछते हैं, और वह उन्हें परेशानी का हल बताती हैं। जावित्री बताती हैं कि एक युवक एचआईवी से पीड़ित है, शादी के एक साल बाद ही उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई। इसी तरह एक अन्य युवती का पति की भी शादी के एक साल मृत्यु हो गई थी। युवती के परिजनों ने शादी कराने को कहा तो जावित्री ने दोनों का जोड़ा बनवा दिया। परिजनों ने दोनों की शादी करा दी। शादी के बाद युवती के परिजन व युवती बेहद खुश हैं और दांपत्य जीवन बिता रही है। इससे पूर्व भी वह एचआईवी पीड़ित दो जोड़ों की शादी करा चुकी हैं। अब तो एचआईवी पीड़ित युवकों की ओर से शादी कराने का बहुत दबाव रहता है। वह अधिकारपूर्वक कहते हैं कि मैडम हमारी शादी जल्दी कराइए, नहीं तो हम स्वस्थ लड़की से शादी कर लेंगे, फिर आप कुछ मत कहना। लेकिन जावित्री इसके लिए मना कर देती हैं। जावित्री का कहना है कि शादी के लिए एचआईवी पीड़ितों के परिजन हों या स्वयं युवक-युवती, सभी को सजातीय रिश्ते चाहिए। अब सजातीय लड़के लड़की कहां से आएं। यही कारण है कि एचआईवी पीड़ित युवकों की शादी के लिए लंबी लाइन लगी है।