अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्रों का महामारी के चलते हुए लाक डाउन मे ही घर जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। पश्चिम बंगाल के 70 छात्र, जो कि मई महीने में ट्रैन में स्लीपर कोच की व्यवस्था न होने के चलते अपने घर नहीं जा सके थे, अब ₹135000 स्वयं खर्च करके अपने घर जाने की व्यवस्था कर रहे हैं।
इन छात्रों के संबंध में विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल हफीज गांधी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सरकार को भी लिखा था। लेकिन इनकी समस्या का नहीं हो सका था। इससे पहले मई में विश्वविद्यालय प्रशासन ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई ट्रेन से 240 छात्रों को भेजने की व्यवस्था की थी। सभी छात्र मथुरा तक बस के माध्यम से भेजे गए थे। लेकिन 70 छात्र वापस अलीगढ़ लौट आए थे। इनका कहना था कि ट्रेन में स्लीपर कोच की व्यवस्था नहीं थी। इस संबंध में विश्वविद्यालय जनसंपर्क विभाग के एमआईसी प्रोफेसर शाफे किदवई कहते हैं इस ट्रेन की व्यवस्था पश्चिम बंगाल सरकार ने की थी। यह बात सही है कि ट्रेन में कुछ अव्यवस्थाएं थीं। लेकिन इसके विषय में पश्चिम बंगाल सरकार ही कुछ कह सकती है। यह छात्र बस के माध्यम से अपने घरों तक जाना चाहते थे। लेकिन इतनी लंबी दूरी की यात्रा बस के माध्यम से करने की इजाजत विश्वविद्यालय नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि 15 जून से विश्वविद्यालय में अवकाश के चलते डाइनिंग व्यवस्था बंद हो रही है।