रेलवे स्टेशन की नई बिल्डिंग का निरीक्षण करते डीआरएम मोहित चंद्रा
- फोटो : अमर उजाला
अलीगढ़ स्टेशन का जल्द ही कायाकल्प होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यहां करीब 450 करोड़ रुपयों से स्टेशन का आधुनिकीकरण होगा। जिसमें अलीगढ़ स्टेशन के लेकर दाऊद खां स्टेशन तक ओवर ब्रिज का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके निर्माण से रेल सुविधाएं बढ़ने के साथ-साथ शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में भी सुधार हो सकेगा।
इस परियोजना के तहत अंग्रेजों के जमाने में बने और 156 साल पुराने स्टेशन की इमारत को ध्वस्त कर नए सिरे से निर्माण की तैयारी है। इसके लिए बृहस्पतिवार को प्रयागराज मंडल के डीआरएम मोहित चंद्रा ने एडीआरएम संजय कुमार समेत तमाम अफसरों के साथ टूंडला से अलीगढ़ तक विशेष यान के जरिए निरीक्षण किया। उन्होंने स्टेशन के प्लेटफार्म और नई बिल्डिंग का जायजा भी लिया। उन्होंने अधीनस्थ अफसरों के साथ स्टेट बैंक, बरछी बहादुर पुल से गांधीपार्क रोडवेज बस स्टैंड से दाऊद खां रेलवे स्टेशन तक प्रस्तावित ओवर ब्रिज की संभावनाओं को तलाशा। करीब छह घंटे के प्रवास के दौरान कहा कि जल्दी ही पुरानी बिल्डिंग के कार्यालयों को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा।
सीमा फाटक पर ब्रिज का प्रस्ताव लंबित
सीमा टाकीज फाटक से ओवर ब्रिज के निर्माण की राह आसान नहीं दिख रही है। कचहरी की साइट से तो रास्ता है, लेकिन बन्नादेवी की तरफ सीमा टॉकीज एवं नई बस्ती की ओर रास्ता न मिलने के कारण पेच फंस गया है। इस रास्ते की जद में 150 मकान आड़े आ रहे हैं। यहां ओवर ब्रिज का निर्माण होने पर हादसों पर रोक लग सकेगी। स्थानीय नागरिकों के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए सांसद सतीश गौतम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
इसके निर्माण में घनी आबादी वाली नई बस्ती की तरफ रास्ता सकरा होने के साथ - साथ यहां अतिक्रमण भी अधिक है। यदि अतिक्रमण हटता है तो दोनों साइड के 150 घर इसकी जद में आएंगे। वहीं, सीमा टॉकीज वाले रास्ते को चुना जाता है तो यहां घरों के साथ -साथ दुकानें भी जद में आएंगी। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी इन दोनों रास्तों को लेकर असमंजस में हैं। इस इलाके में रोजाना तकरीबन 20 हजार लोगों का आवागमन होता है। ट्रेन गुजरने के दौरान रेल फाटक बंद होता है तो यहां वाहनों की कतार लग जाती है। कुछ लोग जल्दबाजी में फाटक को क्रॉस करने के चक्कर में अपनी जान गंवा चुके हैं।