मदरसा फैजाने मुस्तफा की जांच करने पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी अल्वी द्विवेदी।
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प्रदेश सरकार मदरसों का सर्वे करा रही है यह अच्छी बात है लेकिन यहां के 250 से अधिक ऐसे मदरसे हैं जिन्हें मान्यता की दरकार है। मान्यता मिले तो उनमें पढ़ने वाले बच्चों को कुरान के साथ-साथ कंप्यूटर की शिक्षा भी उपलब्ध हो सके। इन सुविधाओं के न मिलने के कारण गली मोहल्लों तथा मस्जिदों में संचालित मदरसों में बच्चे परंपरागत पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। अधिकांश मदरसा संचालकों का यही दर्द है कि उनमें पढ़ने वाले बच्चों के हाथ में कंप्यूटर हो।
प्रदेश सरकार ने 12 साल से मदरसों को मान्यता देना बंद कर दिया है। जिसके कारण जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय में मान्यता के लिए मदरसों के आवेदन नहीं आए हैं। इन परिस्थितियों में गली मोहल्लों में बच्चों को पढ़ाई के लिए समाज के सभ्रांत नागरिकों पर मदरसे खोलने के लिए दबाव भी बन रहा है। ऐसे में विक ल्प तलाश भी तलाश लिया है, जिसके तहत चिट फंड सोसाइटी में संस्था का रजिस्ट्रेशन करा दिया जाता है। वही संस्था शहर में जरूरत के अनुसार दो चार मदरसे संचालित कर देती है।
जीवनगढ़ एवं जाकिर नगर स्थित मदरसा के संचालक मौलाना फजले शान का कहना है सरकार ने मदरसों की मान्यता पर रोक लगा रखी है। सरकार मान्यता दे तो मदरसों का संचालन और बेहतर तरीके से हो, हम लोगों की मंशा है कि मदरसों में दीन के साथ - साथ आधुनिक शिक्षा दिर्लाई जा सके। इसके लिए आर्थिक मदद की आवश्यकता है।
चंदे का रिकॉर्ड नहीं बता सके मदरसा संचालक
मदरसा की जांच करने बेसिक शिक्षा विभाग के खंड शिक्षाधिकारी नगर एल बी द्विवेदी के नेतृत्व में टीम शहर के कई स्थानों पर पहुंची। उसी टीम ने मदरसा संचालकों से मदरसा के संचालन को लेकर जानकारी हासिल की लेकिन जोहराबाग स्थित मदरसा फैजान -ए - मुस्तफा में चंदे का रिकॉर्ड संचालक नहीं बता सके। यह मदरसा 1990 से संचालित है, जो कक्षा पांच तक मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। टीम ने 12 बिंदुओं के बारे में मदरसा संचालक सैयद जमाल से जानकारी मांगी है। खंड शिक्षाधिकारी ने बताया कि मदरसा में पढ़ने वालों बच्चों से 10 रुपये महीने फीस ली जाती है, जबकि बाकी पैसे चंदे से आते हैं। हालांकि, जब चंदे का रिकॉर्ड मांगा, तो उनके पास नहीं था। इस संबंध में रिपोर्ट तैयार की जा रही है।