13 साल झेला.. अब जमीन दो या मुआवजाअमर उजाला ब्यूरोअलीगढ़। आवास विकास परिषद की रामघाट योजना-13 में अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित भूमि के मालिक किसानों ने शुक्रवार को क्वार्सी पैंठ में परिवार की महिलाओं और बच्चों के साथ पड़ाव डाल दिया। आंदोलन को खत्म कराने के लिए बड़ी संख्या में फोर्स लेकर वार्ता करने पहुंचे एक्सईएन के साथ खूब नोकझोंक हुई। 10 जुलाई तक आवास विकास परिषद बोर्ड को अधिग्रहण का प्रस्ताव बनाकर भेजने का वादा करने के बाद ही किसानों ने उनको जाने दिया।आवास विकास परिषद ने अपनी रामघाट योजना-13 के लिए क्वार्सी, चिलकौरा और देवसैनी गांव की सैकड़ों एकड़ भूमि को अधिग्रहण के लिए किसानों को मुआवजा दिये बिना ही मालिकाना हक छीन लिया। तीन दशक से अटकी इसकी प्रकिया से गुस्साए किसानों ने अपनी संघर्ष समिति बनाकर क्वार्सी पैठ में महापंचायत की। इसमें आवास विकास परिषद पर भूमाफिया से सांठगांठ का आरोप लगाया। उनकी मांग की थी 17 फरवरी 1984 से लंबित अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाए अथवा उनका मालिकाना हक वापस दिया जाए। महापंचायत में महिलाओं ने भी बढचढ़ कर भाग लिया। किसानों के तेवर देख करीब तीन बजे आवास विकास परिषद के एक्सईन मुकेश यादव वार्ता करने पहुंचे। वार्ता के लिए वह बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स साथ लेकर गए। पहले से वहां फोर्स तैनात था। पूर्व विधायक विवेक बंसल, जाट महासभा के अध्यक्ष इं. रामसिंह, विजेन्द्र सिंह, भाकियू के उपाध्यक्ष नत्थू सिंह, सांसद सतीश गौतम प्रतिनिधि नत्थी सिंह, उदयभान सिंह की मौजूदगी में किसान संघर्ष समिति के नेता एडवोकेट राजकुमार सिंह और महापंचायत की अध्यक्षता कर रहे मास्टर ओमवीर सिंह ने वार्ता की। किसानों का कहना था कि समझौता के तहत किसान जमीन देने को तैयार हैं तो फिर आगे की कार्रवाई क्यों नहीं की। एक्सईएन का कहना था कि पीछे की कार्यवाही मुझे नहीं मालूम। मैं अब आया हूं । अब प्रस्ताव बनाकर भेज रहा हूँ। किसान इस बात पर भी खफा थे कि पांच जून 15 को सहमति पत्र देने के बाद भी आवास विकास अभी तक यह क्यों नहीं पता कर पाया कि क्वार्सी, चिलकौरा और देवसैनी नगर निगम में हैं कि ग्राम पंचायत में। एक्सईएन ने नगर निगम द्वारा प्रमाण पत्र नहीं देने की बात की तो किसानों ने दो टूक कह दिया कि तीनों ग्राम पंचायत हैं तो प्रमाण पत्र क्यों मांगा जा रहा है। बाद में एक्सईएन का कहना था कि नगर निगम से प्रमाण पत्र मिल जाएगा। एक्सईएन ने 10 जुलाई तक का समय मांगा। कहा कि वह दस जुलाई तक वर्तमान भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज देंगे। पहले चरण में खाली भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। दूसरे चरण में जमीन पर जो मकान बन चुके हैं, उन पर उच्च स्तरीय कमेटी द्वारा विकास कर लगाया जाएगा। वो मकान आवास विकास की योजना में ही रहेंगे। इसके बाद ही किसानों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। इसमें कार्यवाही न होने पर फिर से आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इसमें चंद्र पाल शर्मा, साबिर खां, भगवती प्रसाद शर्मा, बाबी, ओमवीर सिंह, लक्ष्मण सिंह, रनवीर सिंह, राजकुमार सिंह, जयंत सिंह आदि उपस्थित रहे, सभा का संचालन रंजन राना ने किया।