उत्तर प्रदेश राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले पहुंची महिलाओं
का कहना था कि जब प्राइमरी से लेकर इंटरमीडिएट तक विद्यालय बंद हैं तो
आंगनबाड़ी केंद्र क्यों खोले जा रहे हैं। अभिभावक भी केवल पोषाहार के लालच
में अपने बच्चों को केंद्रों पर भेजने तैयार नहीं है। उनका कहना था कि जून
माह में अवकाश घोषित कर दें। साप्ताहिक पोषाहार तय समय वितरित कर दिया
जाएगा। अन्य जिलों में अवकाश भी हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे
भी तो बच्चे हैं। उन्हें कम से कम से एक माह का समय तो दे ही सकती हैं।
ब्लाक के अधिकारियों के बारे में शिकायत की कि नियमानुसार पोषाहार
आंगनबाड़ी केंद्र पर पहुंचना चाहिए लेकिन ब्लाक के अधिकारी नहीं पहुंचाते।
उन्हें भाडे़ पर आटो करके ब्लाक पर जाना पड़ता है। वहां भी बिना सुविधा
शुल्क के पोषाहार नहीं दिया जाता है। एक बार पोषाहार लेने में 750 से 1000
रुपये तक खर्च हो जाते हैं। यही नहीं आंगनबाड़ियों की अन्य योजनाओं के
कार्यों में ड्यूटी लगा दी जाती है जो नियम विरुद्ध है। प्रदर्शन में संघ
के जिलाध्यक्ष डालचंद चौधरी, रजनी, विमला, कृष्णा, ममता, बेबी, सुधा आदि
शामिल रहीं।