जिन के ऊपर सरकार के आदेशों को पालन कराने का जिम्मा है, वह खुद ही नियम तोड़ रहे हैं। बड़े-बड़े अफसर निजी वाहनों को अनुबंधित कर उनमें फर्राटा भर रहे हैं। इतना ही नहीं इन वाहनों पर हूटर भी लगाए गए हैं। अब टैक्सी परमिट का क्या ही काम है, जब वाहन पर एसडीएम तो कहीं उत्तर प्रदेश सरकार का नाम है।
जिले में धड़ल्ले से निजी वाहनों को अनुबंधित कर उन पर हूटर लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर वाहनों से हूटर हटवाए गए थे। इन निजी वाहनों पर इसलिए हूटर लगे रह गए क्योंकि इन पर उत्तर प्रदेश सरकार तो कहीं किसी बड़े अफसर का पदनाम लिखा था। आए दिन ये वाहन कलेक्ट्रेट, विकास भवन व अन्य सरकारी कार्यालयों में खड़े नजर आते हैं। इसके बाद भी आज तक किसी भी अधिकारी ने नियम विरुद्ध हो रहे इस कार्य को रोकने की कोशिश नहीं की।
केस एक
विकास भवन में जिला कार्यक्रम अधिकारी का कार्यभार डिप्टी कलेक्टर योगेंद्र सिंह देख रहे हैं। विभाग में उनके लिए एक निजी वाहन को अनुबंधित कर लिया है, जो नियम विरुद्ध है। कार पर आगे और पीछे एसडीएम लिखा गया है। इतना ही नहीं नियमों को खुलेआम चुनौती देकर दो हूटर भी लगाए गए हैं।
केस दो
बेसिक शिक्षा विभाग में वित्त एवं लेखाधिकारी के लिए एक निजी कार को अनुबंधित किया गया है, जबकि टैक्सी परमिट वाहन को ही अनुबंधित किया जा सकता है। कार पर आगे और पीछे उत्तर प्रदेश सरकार लिखा गया है। साथ ही छत पर दो हूटर भी लगे हैं। अब किसकी जुर्रत है कि गाड़ी को रोक सके।
घर की शोभा बढ़ाते हैं उत्तर प्रदेश सरकार लिखे वाहन
विभागों में अनुबंधित निजी वाहनों को चालक शाम को अपने घर ले जाते हैं। इसके बाद उच्चाधिकारियों के पदनाम और उत्तर प्रदेश सरकार लिखे ये वाहन चालक के घर की शोभा बढ़ाते हैं। अवकाश के दिनों में भी सड़क पर वाहन लिए ये चालक आपको घूमते नजर आ जाएंगे। इससे सरकार और प्रशासन की छवि को भी बट्टा लग रहा है।
- निजी वाहनों पर लगे हूटर अभियान चलाकर हटवाए गए थे। विभाग में अनुबंधित निजी वाहन नियम विरुद्ध हैं। अगर उन पर हूटर लगाए गए हैं तो गलत है। अगर कहीं ऐसा किया गया है तो वाहन का चालान काटा जाएगा। - शिवम यादव, एआरटीओ
-