कासगंज। जिले में 17 दिन से ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदे बाढ़ का सामना कर रहे हैं। उन्हें हाईफ्लड लेवल की बाढ़ आपदा से राहत तो मिली लेकिन एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी गंगा का जलस्तर के खतरे के निशान से नीचे नहीं आने से बाढ़ का संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। बैराजों से लगातार पानी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव हो रहा है। ग्रामीण विशेषकर किसान खेतों में भरे पानी की निकासी का इंतजार कर रहे हैं। खेती में काफी बर्बादी हुई है। बाढ़ से कटे हुए रास्ते जर्जर हाल हैं। नाव ही एक मात्र ग्रामीणों के आवागमन का सहारा है। दरअसल, 5 अगस्त को गंगा के जलस्तर ने खतरे के निशान को पार किया था। इसके बाद गंगा का पानी लगातार हाईफ्लड की ओर बढ़ता चला गया। अभी जलस्तर खतरे के निशान से नीचे नहीं उतरा। 10 अगस्त को गंगा हाईफ्लड लेवल को भी क्रॉस कर गया। हाईफ्लड लेवल होने पर जिले में कई रास्ते कट गए। 50 गांवाें की आबादी बाढ़ से प्रभावित हो गई। हाईफ्लड लेवल का पानी तो उतर गया, लेकिन खतरे के निशान के ऊपर गंगा का जलस्तर होने के कारण प्रभावित इलाकों से पानी की निकासी नहीं हो पा रही। पानी का स्तर जरूर कम हो गया है। लगातार खेतों और आबादी इलाकों में पानी भरा होने के कारण लोग परेशान है। फसलों के साथ-साथ ग्रामीणों का आवागमन भी खासा प्रभावित है। पटियाली इलाके के मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला तरसी, नगला खंदारी, नेथरा, इंद्राजसनपुर, मेहोला, नवाबगंज नगरिया, टिकुरी गठौरा, कुसौल, जिझोल, पनसोती, अलीपुर भकुरी, रिकहरा, गठैरा, नरदौली पुख्ता सहित आस पास के ग्रामीण इलाकों की आबादी व खेतों में पानी भरा है। वहीं,सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, सहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे सहित आस पास के तमाम गांव प्रभावित हैं।