दीवानी परिसर में भी पूर्व में गोली मारने की घटनाएं हो चुकी हैं। 33 साल पहले एक अपराधी को न्यायालय के अंदर घुसकर गोली मार दी गई थी। दीवानी परिसर में कुछ समय तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने के बाद समय के साथ सब कुछ सामान्य हो जाता है।
वर्ष 1990 में अपर जिला जज प्रथम के न्यायालय के अंदर कठघरे में खड़े हत्या के आरोपी महेश यादव निवासी धोबई थाना करहल को गोली मार दी गई थी। वह हत्या के एक मुकदमे में तारीख करने जेल से न्यायालय में आया था। पुलिस कर्मियों ने दो आरोपियों को मौके से पकड़ा भी था।
वर्ष 2021 में अपर जिला जज चतुर्थ के न्यायालय में जेल से तारीख करने आया मनीश यादव निवासी जलालपुर खुद के पास रखे तमंचे से चली गोली से घायल हुआ था। उसे गोली न्यायालय के अंदर लगी थी। उसके पास से तमंचा बरामद हुआ था। मनीश के पास तमंचा पहुंचाने का आरोप उसकी पत्नी सीमा पर लगा था। मनीश पर अपने पिता सुखराम यादव, सौतेली मां सुषमा देवी और सौतेले भाई अभिषेक यादव की गोली मारकर हत्या करने का आरोप था।
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तारीख पर आई पत्नी को परिसर में मारी थी गोली
वर्ष 2022 में थाना कुर्रा के गांव तखरऊ की रहने वाली एक महिला को फर्रुखाबाद निवासी उसके पति ने तारीख करने के बाद दीवानी न्यायालय के बाहर निकलकर गोली मार दी थी। महिला का अपने पति से एक मुकदमा चल रहा है। महिला इसी मुकदमे में तारीख करने दीवानी आई थी। आरोप था कि पति तमंचा लेकर ही दीवानी पहुंचा था।