कासगंज। रोडवेज की बसों में उनकी लोकेशन एवं स्पीड की जानकारी के लिए वीटीएस (व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम) लगाए गए थे। बसों में लगे हुए वीटीएस अब खराब हो चुके हैं। जिसके बाद बसों की गति की जानकारी डिपो स्तर पर नहीं हो पाती है। जिस कंपनी को वीटीएस के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, उसका अनुबंध खत्म हो गया है।
डिपो की लगभग 82 बसों में वीटीएस लगाए गए थे। इन बसों में से 8 बसे खटारा होने के कारण डिपो के बेड़ से बाहर हो गईं। जिससे वर्तमान में डिपो के द्वारा अनुबंधित बसों सहित कुल 74 बसों का संचालन किया जा रहा है। इन बसों की निगहबानी के लिए वीटीएस लगाए थे, जिससे उनकी निगरानी डिपो एवं लखनऊ मुख्यालय स्तर पर हो रही थी। बसों के चालक मनमानी ढंग से बसों को अधिक रफ्तार से दौड़ते तो उसे अधिकारियों के द्वारा डिपो एवं लखनऊ मुख्यालय दोनों ही स्तर से पता लगा लेते थे। लेकिन अब जब वीटीएस खराब हो गए है तो स्पीड की जानकारी नहीं हो पा रही है। कोहरा और ठंड में अधिक स्पीड खतरा भी बन सकती हैं।
बस स्टैंड के स्थान पर बाईपास से ही गुजर आती है बसें
वीटीएस लगने के बाद बस किस मार्ग होकर आ रही है वह रिकार्ड हो जाता था। यदि बस चालक गंतव्य स्थान के बस स्टैंड से न होकर यदि बाईपास से निकल आती है तो इसकी जानकारी भी अधिकारियों को हो जाती थी। बस के द्वारा तय किया गया रूट सिस्टम में रिकार्ड रहता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। कई बार बस चालक व परिचालक बस को बस स्टैंड से न ले जाकर बाईपास से ही ले आते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीनों में लगाया गया है जीपीएस
वीटीएस कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद बंद है। बसों की लोकेशन पता करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक टिकट मशीनों में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगाया गया है। जिससे बसों के लोकेशन की जानकारी हो जाती है। निगरानी लखनऊ और स्थानीय स्तर दोनों पर हो रही है।
- ब्रजेश कुमार, संचालन प्रभारी।