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हाथरस में दबोचे गए कुख्यात विनोद जाट का खुलासा, झांसी के सराफ से ली 25 करोड़ फिरौती

Tue, 28 Nov 2017 08:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
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विनोद जाट - फोटो : अमर उजाला
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हाथरस में पकड़े गए ब्रज क्षेत्र के बेहद शातिर अपराधी विनोद जाट से पुलिस ने झांसी के दो सराफों के अपहरण के बारे में भी पूछताछ की है। पुलिस सूत्रों की मानें तो उसने इस अपहरण कांड में हवाला के जरिये फिरौती होने की बात कही है। पुलिस यह मालूम करने में लगी है कि वह सच बोल रहा है अथवा झूठ। उसकी इस बात को लिखापढ़ी में नहीं लिया गया है।
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पुलिस उसके साथियों से भी इस बारे में पूछताछ होगी, उसे फिलहाल जेल भेज दिया गया है। अब रिमांड पर लिए जाने की तैयारी है। उससे पूछताछ के लिए आगरा से भी एसटीएफ की टीम गई थी। पुलिस के सूत्रों की मानें तो उसने कहा, सराफा कारोबारियों को अपहरण के लिए अजय जडेजा ने ही चिन्हित किया था। वह झांसी के सीकरी का रहने वाला है।

कारोबारियों की रईसी को जानता था, उसके गिरोह ने ही यह अपहरण किया था। यह अपहरण 12 जुलाई को किया गया था। इसके बाद उसे ( विनोद जाट को ) रखने के लिए दिया गया। इसके बदले फिरौती का दस फीसदी यानी 2.5 करोड़ रुपये तय किया गया था। यह भी उसे नहीं मिले, उसने कारोबारियों को आगरा, मथुरा और अलीगढ़ में रखा।
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विनोद जाट - फोटो : अमर उजाला
इसके लिए अजय जडेजा के ठिकाने भी इस्तेमाल किए। वह जडेजा से वारदात से 20 दिन पहले मिला था। तभी तय हो गया था कि क्या- क्या करना है। पुलिस का कहना है कि विनोद जाट भी अजय जडेजा के साथ काम कर चुका है। 

बाद में उसने अपना अलग गिरोह खड़ा कर लिया था। हालांकि पुलिस अधिकारी फिरौती वाली बात पर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। मुक्त होने के बाद सराफों ने भी यही कहा था कि उन्होंने कोई फिरौती नहीं दी है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जब उससे आगरा में हुई मुठभेड़ के बारे में पूछा गया तो वह जोर से हंसा। एसटीएफ ने दावा किया था कि झांसी से अगवा सराफ आगरा के सिकंदरा में निखिल वुडलैंड अपार्टमेंट से मुठभेड़ के बाद मुक्त कराए गए। 

इसमें विनोद जाट भाग निकला। अब फिरौती की बात सामने आने से मुठभेड़ की कहानी पर सवालिया निशान लग गया है। यह सवाल तब भी उठ रहा था, क्योंकि 500 पुलिसकर्मियों के बीच से उसके भागे जाने की बात पर किसी को यकीन नहीं हो रहा था।
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बर्खास्त सिपाहियों ने खड़ा किया गिरोह

विनोद जाट - फोटो : अमर उजाला
हाथरस में पकड़ा गया संतोष जाट भी बर्खास्त सिपाही है। इसी ने गैंग के सरगना देवेंद्र जाट से अपने गांव के बर्खास्त सिपाही विनोद की मुलाकात कराई थी, जिसके बाद विनोद अपराध की दुनिया में कूद पड़ा और संतोष से आगे निकल गया। इनके गिरोह में आगरा, मथुरा, हाथरस और अलीगढ़ जिलों के 15 बदमाश हैं। लूट करने वाला यह गिरोह अब अपहरण भी करने लगा है।  

28 दिसंबर 2015 को आगरा जिले के कागारौल में पशु व्यापारी से 45 लाख रुपये की लूट में देवेंद्र, विनोद और संतोष तीनों शामिल थे। फिलहाल देवेंद्र अलीगढ़ जेल में बंद है, इसलिए गिरोह की कमान विनोद और संतोष के हाथ में है। देवेंद्र भी बर्खास्त सिपाही है। यह गिरोह बर्खास्त सिपाहियों ने ही खड़ा किया है।
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