चार साल पुराने कूड़ेदान फर्जीवाड़े में विजिलेंस आगरा ने जिले में डेरा जमा लिया है। मंगलवार को टीम ने दो विकास खंडों में पहुंचकर ग्राम पंचायत सचिवों के बयान दर्ज किए। अन्य ब्लॉकों में भी टीम बयान दर्ज करेगी। विजिलेंस जांच में आई तेजी से ग्राम प्रधान और सचिवों की नींद उड़ गई है। उन्हें जांच में फंसने का डर सता रहा है।
ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के नाम पर कूड़ेदान स्थापित कर एक बड़ा फर्जीवाड़ा 2019 में किया गया था। तत्कालीन डीपीआरओ यतेंद्र सिंह के निलंबन के साथ ही विजिलेंस आगरा ने भी मामले की जांच शुरू की थी। चार साल में अब तक विजिलेंस की जांच एक कदम नहीं बढ़ सकी। लेकिन अब विजिलेंस आगरा के जांच अधिकारी दुष्यंत तिवारी ने जांच को पूर्ण करने का निर्णय लिया है। इसी के तहत विजिलेंस की टीम ने मैनपुरी में डेरा जमा लिया है। टीम विकास खंडों में पहुंचकर अब सीधे बयान ले रही है।
मंगलवार के विजिलेंस आगरा के उप निरीक्षकों ने विकास खंड मैनपुरी और करहल पहुंचकर ग्राम पंचायत सचिवों के बयान दर्ज किए। उन्होंने सहायक विकास अधिकारी पंचायतों से भी जानकारी जुटाई। पूरे दिन बयान लेने के बाद टीम ब्लॉक से वापस लौट गई। अचानक तेज हुई विजिलेंस आगरा की जांच से जिम्मेदारों में खलबली मच गई है।
ग्राम पंचायत से लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय तक कर्मचारियों की नींद उड़ गई है। दरअसल कूड़ेदान फर्जीवाड़े में कई लोगों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जल्द ही टीम ने अन्य ब्लॉकों में भी पहुंचकर पंचायत सचिवों के बयान दर्ज करेगी।
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निर्धारित बिंदुओं पर लिए जा रहे लिखित बयान
ग्राम पंचायत सचिवों से लिखित बयान दर्ज कराने के लिए विजिलेंस आगरा की टीम ने कुछ बिंदु निर्धारित किए हैं। इसमें ग्राम पंचायत में बेस लाइन सर्वे की सूची के संबंध में जानकारी के साथ ही गांव को ओडीएफ घोषित किए जाने और कूड़ेदान लगवाने संबंधी बिंदु शामिल हैं। इन्हीं बिंदुओं पर निर्धारित फॉर्मेट पर सचिव अपना लिखित जवाब दाखिल कर रहे हैं।
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विभाग अभिलेख देने में कर रहा आनाकानी
विजिलेंस टीम में शामिल एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंचायत राज विभाग के कारण ही जांच पूरी नहीं हो पा रही है। विभागीय अधिकारियों द्वारा जांच के लिए जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। कई बार इसके लिए प्रयास किया गया, लेकिन आधे-अधूरे अभिलेख ही उपलब्ध कराए जाते हैं।