कासगंज। जिले में सोरोंजी तीर्थनगरी की धरा पर भगवान वराह का प्राकट्य हुआ। पटियाली में संगीतकार एवं कवि अमीर खुसरो का जन्म हुआ। महाभारत कालीन तमाम अवशेष पटियाली में मौजूद हैं। जिले का पुरातात्विक महत्व है। यहां प्राचीन समय से मानव सभ्यता के प्रमाण मिलते हैं लेकिन अधिकृत खोज एवं संरक्षण का कार्य जिले में नहीं हुआ है। इसे देखते हुए डीएम मेधा रूपम ने मंगलवार को रुद्राक्ष सभागार में बैठक कर प्रशासनिक अधिकारियों, एएमयू के पुरातत्वविद् एवं विशेषज्ञों के साथ मंथन किया। छह माह में खोज व संरक्षण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया।जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि जिले में पुरा महत्व की तमाम चीजें हैं, जो पुरानी मानव सभ्यता का प्रमाण हैं। इसकी अधिकृत खोज जरूरी है। पुरातात्विक महत्व के स्थानों को संरक्षित करना आवश्यक है। इसके लिए उन्होंने जिले की सभी तहसील के एसडीएम व तहसीलदारों को निर्देशित किया कि वह लेखपालों द्वारा पुराने रिकार्ड में संपत्तियों के दर्ज ब्यौरे की पड़ताल कराएं, जिसके माध्यम से कई महत्वपूर्ण विरासतों के बारे में जानकारी मिल सकती है और उन्हें खोजा जा सकता है। जिलाधिकारी ने कहा कि कासगंज ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व की महत्वपूर्ण जानकारियां देश के लोगों को मिलेंगी तो जिले के महत्व को समझ पाएंगे। इससे जिले को मजबूत पहचानमिलेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वह महत्वपूर्ण जानकारियों को अपने एसडीएम को साझा कर सकते हैं। मंथन बैठक में पुरातत्वविद् एएमयू के प्रोफेसर एमके पुंढीर, इतिहासकार उमेश पाठक, शरद लंकेश, राव मुकुल मान सिंह, विशेषज्ञ अमित तिवारी, अनुपम शर्मा, एसडीएम सहावर कोमल पंवार, एसडीएम पटियाली कुलदीप आदि शामिल रहे।