मैनपुरी। स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण जननी सुरक्षा योजना में भ्रष्टाचार की जांच में सीएचसी सलूक नगर बरनाहल पर तैनात दो कर्मचारी विभागीय जांच में दोषी पाए गए हैं। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद जिला स्वास्थ्य समिति ने दोनों के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई की है। कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति है। सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण अंचल में 1400 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये की धनराशि प्रदान की जाती है। सीएचसी बरनाहल पर एक ही महिला का एक साल में तीन-तीन बार प्रसव दिखाकर जननी सुरक्षा योजना का लाभ दिए जाने की शिकायत यहां तैनात एलटी (लैब टेक्नीशियन) विवेक पाल ने जनवरी 2025 में जिलाधिकारी और सीएमओ से की थी। शिकायत कर्ता ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी मामले की शिकायत की थी। इसमें तत्कालीन प्रभारी चिकित्साधिकारी की संलिप्तता बताते हुए जननी सुरक्षा योजना में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। मामले की जांच जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएमओ डॉ. आरसी गुप्ता ने एसीएमओ डॉ. विजेंद्र सिंह और डिप्टी सीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह के साथ जिला प्रोग्राम मैनेजर संजीव वर्मा को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में सीएचसी पर तैनात ब्लाक कार्यक्रम प्रबंधक संदीप दुबे और ब्लॉक एकाउंट मैनेजर धर्मेंद्र शाक्य को दोषी पाया गया। जांच अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को जिला स्वास्थ्य समिति ने संदीप दुबे और धर्मेंद्र शाक्य को दोषी मानते हुए सेवा से बाहर कर दिया।