कोरोना काल में हुआ कर्ज
कोरोना काल में कर्जे में आ चुके जादूगर एस कुमार कहते हैं कि पहले एक साल में देशभर में 50 शो कर लेते थे। अब एक साल में पांच शो मुश्किल से हो पाते हैं। इन मुश्किलों में कर्जे की मुश्किल रुला देती है। जादू का जादू कहीं नहीं चल रहा है।
ललित कला के दायरे में आए
जादूगर संजय कश्यप का कहना है कि जादू को बचाने के लिए इस विधा को ललित कला के दायरे में लाया जाए। सरकार को जादूगरों के लिए ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे भारतीय जादू का अस्तित्व जिंदा रह सके।
जादू का हत्यारा सोशल मीडिया
जादूगर दीवान सिंह राजौरिया सोशल मीडिया को जादू का हत्यारा बताते हैं। सोशल मीडिया पर 90 प्रतिशत जादू नकली चल रहा है। बदलती तकनीक के दौर में कई जादूगर तकनीक का उपयोग कर इसे लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
जादू विधा पर मंडरा रहा खतरा
पीपल मंडी की रहने वाली 70 साल की सविता छाबड़िया जादू देखने के लिए अपने मम्मी-पापा के साथ पांच किलोमीटर दूर पैदल जादूगरों का शो देखने जाती थीं। सविता बताती हैं कि उस दौर में शो देखने का जादू सिर चढ़कर बोलता था। अब सब कुछ मोबाइल में सिमट गया है। इससे जादू विधा पर खतरा मंडराने लगा है।