कासगंज। गंगा में बाढ़ का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। तीन दिन पूर्व हरिद्वार और बिजनौर से छोड़े गए हाईफ्लड लेबल के पानी का प्रवाह नरौरा बैराज से भी बढ़ गया है। बढ़ा हुआ पानी कछला ब्रिज तक आने लगा है औरयह खतरे के निशान की ओर पानी बढ़ रहा है। जिले में प्रभावित इलाकों के खेतों में पानी भरा हुआ है। खेतों में बाढ़ का पानी भरने कारण दो से ढाई हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलें जलमग्न हो गईं हैं। किसानों को बड़े नुकसान की चिंता सता रही है। नरौरा से 24 घंटे पूर्व दो लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह चल रहा था। अब यह प्रवाह बढ़कर तीन लाख के आंकड़े को पार कर गया है। ऐसी स्थिति में जिले में बाढ़ के हालात और विकराल हो सकते हैं। सोरोंजी के लहरा गांव के खेतों में पानी भरा हुआ। वहीं कुष्ठ आश्रम और पाठकपुर तक गंगा का पानी पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों के बिटोरे, बुर्जी आदि को नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी धान की फसल खराब होने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीण लोग अपना घरेलू सामान बैलगाड़ियों में लादकर सुरक्षित स्थानों की ओर भेज रहे हैं। निकटवर्ती गांव डिंगलेशनगर, बघेला, दतलाना, खड़ेरी, पिलो सराय, चेलारी, भीलौर में पानी की दस्तक होने लगी है। वहीं पटियाली इलाके के बाढ़ प्रभावित इलाके नगला हंसी, नगला दुरजन, नगला जयकिशन, नगला नरपत, नगला पनसौती, मूंजखेड़ा, नगला दिपी, नगला हंसी, नगला खना, नगला जैली, हिम्मतनगर बझेरा, रिजौला, नगला दुर्जन, नगला नैनसुख में गंगा के पानी की आबादी तक दस्तक है। इससे ग्रामीण बेहद परेशान हैं। धान, मक्का, बाजरा, अरबी की फसलें पानी में डूबी हुई हैं। सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, सहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे आदि गांव के खेतों में पानी भरा हुआ है। नगला नरपत के धर्मेंद्र, किशनपाल, अशोक कुमार सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से बाढ़ का पानी भरा होने से खेती-बाड़ी बर्बाद होती जा रही है। हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। रास्ते कटे होने से नाव से ही आवागमन करना पड़ रहा है। पटियाली इलाके की कादरगंज गंगा पर सिंचाई विभाग के द्वारा 12 करोड़ रुपये की लागत से बांध और स्टड कटान रोकने के लिए स्थापित किए गए थे, लेकिन गंगा का पानी इतना बढ़ता जा रहा है कि कई फुट पानी स्टड और कटान रोकने के लिए तैयार किए गए बांध पर बढ़ गया है। सिंचाई विभाग के अधिकारी इन कार्यों की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। शनिवार को भी सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता संदीप जैन टीम के साथ कादरगंज पहुंचे और पानी की स्थिति का जायजा लिया।बाढ़ के पानी का कहर झेल रहे गंगा के तटीय इलाके के किसानों के सामने शनिवार को बारिश के पानी से संकट खड़ा हो गया। जो किसान बाढ़ के पानी से बचाव कर रहे थे वह बारिश के पानी से बचाव करने में जुटे नजर आए। प्रभावित इलाके में पशु बारिश के पानी से भीगते रहे। गंगा की बाढ़ का कहर पटियाली इलाके में सर्वाधिक है। प्रशासन लगातार ग्रामीणों से बाढ़ चौकियाें पर पहुंचने की अपील कर रहा है, लेकिन ग्रामीण अभी बाढ़ चौकियों पर नहीं पहुंच रहे। बाढ़ के साथ बारिश का कहर भी बना हुआ है। पीड़ित ग्रामीण परेशान हैं। अब उनकी नजर प्रशासन की राहत पर टिकी है। एसडीएम प्रदीप विमल ने बताया कि शीघ्र ही राहत सामग्री पीड़ितों तक पहुंचाई जाएगी। प्रशासन ने तैयारियां कर ली हैं।भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक रक्षा बंधन का पर्व भी चुनौती भरा रहा। मूंजखेड़ा, नगला नरपत के इलाकों में मार्ग कटे होने के कारण आवागमन नाव के सहारे हो रहा है। राखी के लिए आने जाने वाले भाई बहनों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। नगला नरपत के सौरभ यादव ने बताया कि ग्रामीण बाढ़ के पानी से जूझते रहे। त्योहार को लेकर उत्साह चला गया।