कासगंज। वर्ष 2015 में नगला खिमाई के गौतम सिंह हत्याकांड मामले में अदालत ने दोनों आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अपर जिला सत्र न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव के न्यायालय ने विवेचक निरीक्षक रफत मजीद की विवेचना पर गंभीर प्रश्न उठाए। उनकी कार्यप्रणाली को वृत्तिक अयोग्यता बताते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है। फिरोजाबाद जनपद के कुंजपुर निवासी पदम सिंह ने 12 अगस्त 2015 को थाना सहावर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके अनुसार उनका भतीजा गौतम सिंह जिसकी पहचान नगला खिमाई निवासी आदेश कुमार के परिवार से थी। 6 अगस्त 2015 को शाम 4 बजे बाइक से नगला खिमाई गया था। वादी के अनुसार गौतम की आदेश की बहन से अवैध संबंधों की जानकारी सामने आई थी। गौतम कई दिनों तक घर वापस नहीं लौटा तो वादी लगातार उसकी तलाश करते रहे। 10 अगस्त को नगला खिमाई पहुंचकर लोगों से पूछताछ की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। 12 अगस्त को आदेश कुमार मनवीर,जगदीश और सतीश ने गौतम की हत्या कर शव छिपा दिया। उसकी बाइक गायब कर देने की जानकारी मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने एक कंकाल बरामद कर पोस्टमार्टम कराया था। पुलिस ने विवेचना के बाद आदेश व मनवीर के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिए। अदालत ने आदेश कुमार व मनवीर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। दोनों आरोपी पहले से जमानत पर थे। अदालत ने विवेचक निरीक्षक रफत मजीद की कार्यशैली पर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि विवेचना में गंभीर लापरवाही व पेशागत अयोग्यता बरती गई।