सोरोंजी में तुलसीदास की प्रतिमा
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रामचरितमानस के रचयिता महाकवि संत तुलसीदास की जन्मस्थली को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले के लेकर तीर्थ नगरी के लोग लगातार सक्रिय हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री को रजिस्टर्ड डाक से सूकरक्षेत्र व तुलसीजन्म भूमि के फोटो सहित साक्ष्य प्रेषित किए गए। वहीं सदर विधायक के द्वारा सीएम को पत्र भेजकर तीर्थनगरी सोरोंजी को तुलसी जन्मभूमि बताते हुए भ्रम दूर करने की मांग को तीर्थनगरी के लोगों ने सराहा है।
भेजे गए ये प्रमाण
नमामि गंगे के जिला संयोजक श्रीकांत तिवारी ने शनिवार शूकर क्षेत्र व तुलसी जन्मभूमि के साक्ष्यों को मुख्यमंत्री को रजिस्टर्ड पार्सल से पोस्ट किया है। वराह पुराण, गर्ग संहिता, स्कंद पुराण आदि पौराणिक गंथों में शूकर क्षेत्र की स्थिति भागीरथी गंगा किनारे बताई गई है। डॉ. रामदत्त भारद्वाज, वेदव्रत शास्त्री, डॉ, नरेशचंद्र बंसल, डॉ. रामकृष्ण शर्मा आदि शोधार्थी विद्वानों के शोध पत्रों की प्रति जो शूक रक्षेत्र व तुलसी जन्मभूमि की प्रमाणिकता सिद्ध करते है वो भी भेजी गई हैं। तुलसीदास से जुड़ी धरोहरों गर्भगृह, पाठशाला, स्मारक के छाया चित्र भी मुख्यमंत्री को प्रेषित किए गए हैं।
विधायक ने सोशल मीडिया पर अपलोड की वीडियो
इस संबंध में एक वीडियो विधायक द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड की गई है। नमामि गंगे के प्रदेश सह संयोजक रामेश्वर दयाल महेरे ने कहा कि सदर विधायक का यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है। खुशी जताने वालों में रामकिशन रामलोटा, विशोक अग्रवाल, विकास तिवारी, कैलाश मिश्र, दिनेश चंद्र अतुल गुप्ता, राहुल अग्रवाल, अमरदीप मिश्र, हरिओम श्रीवास्तव, जितेंद्र सैनी, विनोद दीक्षित आदि शामिल हैं।