कासगंज। सितंबर माह में हुई बारिश व बाढ़ ने किसानों की मक्का, धान, बाजरा, ज्वार, गन्ना, तिल, अरहर आदि की फसलों को बर्बाद कर दिया है। हजारों हेक्येटर फसल की बर्बादी देखकर आंखों में आंसू लिए मजबूर किसान भाग्य को कोस रहा है। इस नुकसान से उबरने का उसे फिलहाल कोई रास्ता नजर हीं आ रहा। वे जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता के लिए गुहार लगा रहे हैं। खेतों में पानी भरा होने के कारण प्रशासन की राजस्व टीमें फसलों को हुई क्षति का सही आंकलन नहीं कर पा रही हैं। प्रारंभिक जांच ही राजस्व टीमों के द्वारा की गई है। ऐसे में फिलहाल किसानों को सरकारी राहत भी मिलती नहीं दिख रही। सितंबर माह में 400 एमएम बारिश हुई। पिछले 15 सालों में इतनी बारिश सितंबर माह में कभी नहीं हुई। लगातार बारिश के कारण अतिवृष्टि के हालात उत्पन्न हुए और खेतों में पानी भरा रहा। सदर व सहावर तहसील क्षेत्र में अतिवृष्टि से फसलों को काफी क्षति हुई। वहीं पटियाली तहसील क्षेत्र में अतिवृष्टि के कारण बाढ़ का कहर बन गया और बाढ़ के प्रभाव से नगला खंदारी, नीबिया, नेथरा, कादरगंज इलाके में बांध कट गए और खेतों में गंगा का पानी पिछले 15 दिनों से अभी भी भरा हुआ है। प्रारंभिक सर्वेक्षण में पटियाली क्षेत्र में सर्वाधिक फसलों को क्षति हुई है। पटियाली के नीबिया, पीतमनगर हरौड़ा, नरदौला, किला असदगढ़, कादरगंज, नेथरा, मूंझखेड़ा, नगला दुरजन, नगला जयकिशन, राजेपुरकुर्रा, नगला दिपी व इन गांव के आस पास के इलाके में खेत आज भी पानी से लबालब हैं। किसानों की फसलें गिरकर खेतों में गिर गई हैं और तमाम किसान खेतों में गिरी फसलों को काटकर अब चारे में इस्तेमाल कर रहे हैं। धान की फसलें भी बारिश के साथ चली तेज हवाओं से खेतों में गिर गई और पानी में सड़ गईं। कुछ फसलें तो इतनी खराब हो गईं हैं कि उनका प्रयोग चारे में भी नहीं हो सकता।