कासगंज/सोरोंजी/गंजडुंडवारा। गुरु पूर्णिमा पर्व पर पचास हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। कछला घाट, लहरा घाट, सोरोंजी के हरि की पौड़ी घाट, कादरगंज घाट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालु परिवार के साथ गंगा स्नान के लिए पहुंचे। डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पूजा अर्चना की और प्रसाद चढ़ाया। दूरदराज क्षेत्रों से श्रद्धालु रविवार शाम से ही घाटों पर पहुंच गए थे। सोरोंजी में हरि की पौड़ी व लहरा घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुण्य कमाया। सोमवार तड़के से ही श्रद्धालु गंगा घाट पहुंचने लगे। सर्वाधिक भीड़ कछला घाट पर था। यहां कासगंज, बरेली और बदायूं के श्रद्धालु काफी संख्या में पहुंचे। सोरोंजी में राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली आदि राज्यों से भी श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की आत्म शांति के लिए पुरोहितों से पूजन अनुष्ठान कराया। इस दौरान बच्चों के मुंडन संस्कार कराए गए। इसके अलावा दुग्धाभिषेक और चुनरी भी चढ़ाई गई। हरि की पौड़ी व सूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा कर हरिनाम संकीर्तन भी किया गया। श्रद्धालुओं ने आम, लस्सी, शरबत आदि दान किया। श्रद्धालुओं ने भगवान वराह की आरती उतारकर प्रसाद चढ़ाया।
मंदिरों में पहुंचकर किए दर्शन
सोरोंजी। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद वराह मंदिर, रघुनाथजी, बालाजी दरबार, मानस मंदिर, सोमेश्वर, सिद्ध हनुमान, सिद्ध विनायक, श्याम वराह मंदिर, द्वारिकाधीश, गंगा माता, पंच महाशक्ति आदि मंदिरों में पहुंचकर दर्शन किए और समाज व परिवार उन्नति के लिए कामना की।
भगवान वराह का किया भव्य श्रृंगार
सोरोंजी। गुरु पूर्णिमा पर वराह मंदिर में सेवायत पंडित नरेश त्रिगुणायत ने भगवान वराह को नूतन पोशाक अलंकार पहनाकर शृंगार किया। मंदिर की भी साज सज्जा की गई।
- गुरु पूर्णिमा पर गंगा घाटों में शांति पूर्वक स्नान पर्व संपन्न हुआ। इस दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। - सौरभ दीक्षित, एसपी
जयकारों के साथ कांवड़ियों के जत्थे होने लगे रवाना
कासगंज। गुरुपूर्णिमा पर्व से कांवड़ियों के जत्थे लहरा घाट से गंगाजल लेकर रवाना होने लगे हैं। सुबह सबसे पहले मध्यप्रदेश के ग्वालियर के कांवड़ियों की टोली जलाभिषेक के लिए गंगाजल लेकर निकली। कांवड़िये भगवान भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए बढ़ रहे थे।सोमवार को कांवड़ियों के कई जत्थे सुबह से निकलना शुरू हुए। लहरा घाट में राजस्थान, मध्यप्रदेश, आगरा, मथुरा, हाथरस आदि क्षेत्रों से कांवड़िये पहुंचते हैं। कछला घाट से बदायूं बरेली क्षेत्र के कांवड़िये कांवड़ भरकर ले जाते हैं।