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Agra News: फर्जी एनकाउंटर के बाद भी सिढ़पुरा पुलिस के तेवर नहीं हुए थे ढीले

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कासगंज। सिढ़पुरा पुलिस के फर्जी एनकाउंटर के बाद भी तत्कालीन थाना प्रभारी, दरोगा और पुलिसकर्मियों के तेवर ढीले नहीं हुए थे। पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर के मामले को दबाने के लिए हर हथकंडे अपनाए। फर्नीचर कारीगर की पत्नी व उसके परिजनों को तो डराया धमकाया, साथ ही मामले की पैरवी कर रहे लोगों पर संगीन धाराओं में फर्जी आपराधिक केस दर्ज कर परेशान किया। पुलिस के उत्पीड़नात्मक रवैये के खिलाफ वर्ष 2006 में एटा की सड़कों व कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन किया गया।
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मुख्य रूप से पैरोकारी कर रहे पूर्व प्रधान राजू ने पूरे मामले में बताया कि जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने राजराम की पत्नी संतोष कुमारी को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस तो संतोष कुमारी की नहीं सुन रही थी। वह दर दर की ठोकरें खा रही थी। उसकी यह स्थिति देखकर संतोष की मदद करते हुए पैरवी शुरू की। जैसे ही पुलिस को उनके पैरोकारी करने की खबर मिली तो पुलिस ने उन पर क्षेत्र में अपराधियों से सांठ गांठ करके नवंबर 2006 में जानलेवा हमले का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद दिसंबर 2006 में डकैती का फर्जी मामला दर्ज कराया। यह मामले दर्ज कराने के बाद पुलिस ने एक साल तक घर में नहीं बैठने दिया और तरह तरह से उत्पीड़न करने लगी। फिर इस मामले में साहस के साथ आगे बढ़े और एटा जिला मुख्यालय की सड़कों पर जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट में धरना - प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने जनता के दबाव में दर्ज किए फर्जी मुकदमे जांच पड़ताल के बाद खत्म किया। हाईकोर्ट ने इस मामले में राहत दी। पुलिस की मुठभेड़ की कहानी पर संदेह करते हुए सीबीआई जांच के निर्देश हाईकोर्ट ने दिया था। जिसमें 16 साल के बाद न्याय मिला है। संवाद
न्याय में बढ़ा विश्वास
फर्जी मुठभेड़ में मारे गए राजाराम की मुख्य पैरवी करने वाले पूर्व प्रधान राजू बताते हैं कि उन्हें उम्मीद थी कि न्यायालय जरूर पीड़ित परिवार को न्याय देगा। क्योंकि सीबीआई के अधिकारियों ने मामले की जांच पड़ताल की और सीबीआई न्यायालय ने दोषी पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई। इससे न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है।
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