डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की लेटलतीफी छात्रों का करियर चौपट कर रही है। इसका जीता जागता उदाहरण एमएड के विद्यार्थी हैं। हालत ये कि एक वर्षीय कोर्स की मार्कशीट तीन साल में भी नहीं मिल पा रही है। एमएड 2012-13 की परीक्षा दो साल बाद बीते साल जून में हुई। परिणाम अभी तक नहीं आया। विश्वविद्यालय अधिकारियों से शिकायत करने पर भी छात्रों की समस्या जस की तस है। 2013-14 की बात करें तो ये छात्र परीक्षा के लिए भटक रहे हैं। एमएड का सत्र देरी से होने के कारण विश्वविद्यालय ने 2014-15 में तो प्रवेश प्रक्रिया ही शुरू नहीं की। 2012-13 के छात्र अनूप गुप्ता का कहना है कि एमएड का परिणाम न आने से जॉब के लिए भी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। इधर परीक्षा नियंत्रक केएन सिंह का कहना है कि मूल्यांकन शुरू कराकर जल्द परिणाम घोषित किया जाएगा।