गुंजन के ताऊ रामबाबू ने बताया कि उनके किसी रिश्तेदार ने पुलिस को फोन कर दिया था और गलत इंजेक्शन का आरोप लगाया था। चिकित्सकों के समझाने पर हमने पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया है।
चिकित्सकों के पैनल को लगेगा एआरवी
प्रमुख अधीक्षक डॉ. सीपी सिंह ने बताया कि आशंका है कि बच्ची के इलाज के दौरान रैबीज न फैल गया हो, इसलिए गुंजन के इलाज में लगे डॉक्टरों के पैनल और सपोर्ट स्टाफ को एहतियात के तौर पर एआरवी लगाया जाएगा। गुंजन के इलाज में आठ डाक्टरों और 6 से 8 चिकित्सकीय स्टाफ ने सहयोग दिया था।
रकाबगंज के थानाध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुंची थी। परिजन लापरवाही का आरोप लगा रहे थे। चिकित्सकों के समझाने पर वह मान गए। उन्होंने कोई तहरीर नहीं दी। सिकंदरा पुलिस को भी बुला लिया गया।
गुंजन को लगे थे जख्म, लहूलुहान हुई मौसी
दहतोरा के गगोई गांव निवासी धर्म सिंह की 10 साल की बेटी गुंजन को उसकी मौसी गुड़िया ने पाला था। उसके दम तोड़ते ही गुड़िया बदहवास सी हो गई। एक साल की उम्र में मां के निधन के बाद से ही गुड़िया ने गुंजन को पाला था। मूक बधिर होने के कारण केवल वही उसके एहसास समझ सकती थी। बिलखती हुई गुड़िया मंगलवार को पूरे दिन मासूम बिटिया के पास बैठी रही। सिरहाने से हिली नहीं, पर यह साथ मंगलवार रात तक ही रह पाया।