युद्धक टैंक पर सवार सूबेदार बाबू सिंह का फाइल फोटो
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युद्धक टैंक से गोले दागकर पाक और चीन सेना के छक्के छुड़ाने वाले जैतपुर के सूबेदार बाबू सिंह ने सोमवार को 92 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। वह पिछले दो साल से कैंसर की बीमारी से जिंदगी की जंग लड़ रहे थे।
सूबेदार बाबू सिंह तोमर 1962 में चीन के खिलाफ, 1965 और 71 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ी थी। युद्धक टैंक से गोले दागकर उन्होंने दुश्मन सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। पाकिस्तान की पोस्ट पर तिरंगा लहराकर अपनी वीरगाथा लिखने वाले बाबू सिंह तोमर दो साल से बीमारी से जूझ रहे थे।
गमगीन माहौल में नाती के बेटे शौर्य प्रताप सिंह ने मुखाग्नि दी। मौके पर दामाद पूर्व ब्लाक प्रमुख राजेंद्र सिंह भदौरिया, गजेंद्र सिंह भदौरिया, भाई विश्राम सिंह तोमर, भतीजे आलोक सिंह, रणवीर सिंह, रामवीर सिंह, दिनेश सिंह, नरेश सिंह, रामअवतार सिंह, मुन्ना सिंह, नाती ब्रजेश सिंह, नागेंद्र सिंह रहे।
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बेटी को ही समझते थे बेटा
सूबेदार बाबू सिंह तोमर का कोई बेटा नहीं था। बेटी सुशीला देवी को ही अपना बेटा समझते थे। सुशीला देवी मऊ गांव के रहने वाले जैतपुर के पूर्व ब्लाक प्रमुख राजेंद्र सिंह को ब्याही थी। वह अक्सर कहते थे कि बेटा बेटी एक समान, क्यों भेद करे इंसान।