मैनपुरी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बैंक ऑफ इंडिया कुसमरा को 9945 रुपये का पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने ये आदेश पीड़ित हरदीप सिंह की ओर से दायर वाद पर सुनवाई करते हुए दिया गया है। इसमें बिना एटीएम जारी किए ही बैंक उपभोक्ता से लगातार एटीएम शुल्क के नाम पर धनराशि काटता रहा।
गढि़या छिनकौरा गांव निवासी हरदीप सिंह ने आयोग में एक वाद प्रस्तुत किया था। इसमें कहा था कि बैंक ऑफ इंडिया कुसमरा में उनका बचत खाता संचालित है। साथ ही एक अन्य खाता पत्नी शिल्पी के साथ संयुक्त खाताधारक के रूप में संचालित है। दोनों ही खातों पर चेक बुक जारी हैं। चेक के माध्यम से ही वो लेनदेन करते है। पूर्व में दोनों ही खातों में एटीएम कार्ड जारी थे। लेकिन बाद में चिप वाले एटीएम कार्ड आने पर उनके पुराने कार्ड निष्प्रयोज्य हो गए। इसके बाद बैंक न कोई दूसरे एटीएम कार्ड उन्हें आवंटित नहीं किया।
बिना एटीएम कार्ड आवंटन के वर्ष 2019 से 2023 तक उनके खातों से कुल 1475 रुपये की धनराशि टुकड़ों में एटीएम वार्षिक शुल्क के रूप में बैंक की तरफ से काटी जाती रही। कई बार शिकायत और विधिक नोटिस के बाद भी ये सिलसिला जारी रहा।
इसी के चलते पीड़ित ने आयोग में अपने अधिवक्ता के माध्यम से वाद दायर करते हुए काटे गए 1475 रुपये के साथ ही मानसिक कष्ट के लिए 40 हजार रुपये और वाद व्यय के लिए 25 हजार रुपये का भुगतान कराने की मांग की थी।
आयोग के नोटिस के बाद भी विपक्षी प्रस्तुत नहीं हुए। इसी के चलते आयोग के अध्यक्ष शशिभूषण पांडेय, सदस्य नीतिका दास और नंद कुमार ने वाद में एक पक्षीय आदेश पारित कर दिए।
आयोग ने कुल 9945 रुपये का मुआवजा बैंक द्वारा पीड़ित को दिए जाने के आदेश दिए हैं। इसमें खाते से कटौती के 945 रुपये, मानसिक उत्पीड़न के लिए 3 हजार रुपये और वाद व्यय के लिए 6 हजार रुपये शामिल किए गए हैं। ये धनाशि 45 दिन के अंदर पीड़ित को देनी होगी।