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पिता का अंतिम संस्कार करने भी नहीं आ सके दिल्ली में फंसे बेटे

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संवाद न्यूज एजेंसी कासगंज। कोरोना संक्रमण के चलते मानो समय के चक्र की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। तभी तो सदियों पुरानी परंपराएं टूटने लगी हैं। उस वृद्ध की इससे बड़ी बदनसीबी क्या होगी कि मौत के बाद न तो अपने बेटों का कांधा नसीब हुआ और न ही बेटों के हाथ मुखाग्रि मिल सकी। वृद्ध पिता की सहावर के गांव रेखपुर में बीमारी से मौत हो गई। उसके तीन बेटे लॉकडाउन के कारण दिल्ली में फंसे हुए हैं। गांव रेखपुर निवासी बांकेलाल (६०) पुत्र दिलावर सिंह की बीमारी के चलते बुधवार शाम मौत हो गई। बांकेलाल के तीन बेटे हैं। सत्येंद्र, राजेश और अजयपाल। यह तीनों ही बेटे दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। लॉकडाउन हो जाने के कारण तीनों बेटे दिल्ली में फंस गए हैं। पिता की मौत की खबर ग्रामीणों द्वारा बेटों को मिली तो बेटे दिल्ली से आने की कोशिश में लगे रहे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। इधर बेटे भी घर पर नहीं थे और बुढ़ापे की उम्र में हमसफर भी साथ छोड़ गया। वृद्ध पत्नी वीरवती का दर्द दोगुना हो गया। रातभर वृद्धा रोती रही। मृतक का भतीजा प्रेमवीर जो हाथरस के एक गांव में रहता है। वह किसी तरह रातभर पैदल चलकर कासगंज में रेखपुर गांव पहुंचा। उसके बाद उसने वृद्ध का अंतिम संस्कार किया। पूरे गांव में यह चर्चा का विषय रहा। लोग कह रहे थे कि यह कैसी बिडंबना है कि बेटे अपने पिता को मुखाग्रि भी नहीं दे सके।
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