उत्तर प्रदेश का जिला एटा जिसे तुलसी, खुसरो की सरजमीं कहा जाता है। इस जिले में सत्ता की हनक हमेशा से सिर चढ़कर बोली। जिसकी सत्ता उसका दबदबा भी ऐसा रहा कि कोई हिला न पाया। कारण ये भी है कि एटा की राजनीत को सीधे सैफई परिवार से जोड़कर देखा जाता है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में जब कल्याण सिंह ने यहां से ताल ठौंकी तो उनका साथ मुलायम सिंह यादव ने दिया। इसका परिणाम रहा कि यहां से भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया ने यहां से किसी को आगे नहीं निकले दिया। अब लोकसभा चुनाव 2024 की तिथियां नजदीक आ गई हैं। ऐसे में देखना ये है कि बीजेपी के राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया यहां से जीत की हैट्रिक लगा पाएंगे या फिर अखिलेश ने जिस तरह शाक्य वोट को अपने पाले में डालने के लिए तीर चला है, उसमें उन्हें कामयाबी मिलेगी।
इनकी तरफ है सियासी हवा
अनुज चौहान ने बताया कि सियासी हवा की बात करें तो जो सरकार में हैं उन्हीं की तरफ है। सड़कों की बात करें तो हम एनसीआर के बेहद नजदीक हैं, ऐसे में हमें बेहतरीन सड़कों की जरूरत है। वहीं मीत ने बताया कि सरकार की योजनाएं बहुत अच्छी हैं, लेकिन जरूरत ये है कि ये पात्रों तक पहुंचे और जो इन योजनाओं के हकदार नहीं हैं, उन्हें निकालकर बाहर किया जाना चाहिए।
पॉल्यूशन बनना चाहिए मुद्दा
शनि ने कहा कि आज के दिन हमारे सामने सबसा बड़ा पॉल्यूशन है। इसे न तो कोई पार्टी मुद्दा बताती है न हीं कोई नेता। हम जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं। इस चुनाव में ये मुद्दा होना चाहिए।
शिक्षा के क्षेत्र में चाहिए विकास
केशव सिंह ने बताया कि एटा में खेलने के लिए कोई जगह नहीं है। मेडिकल आ गया स्वागत है, लेकिन पॉलटेक्निक है, इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। ये हमारे छोटे से एटा में नहीं हैं। नए भारत में एटा को ये ही चाहिए। वहीं भरत सिंह ने कहा कि महंगाई चरम पर है। भ्रष्टाचार चरम पर है। मोदी जी का हर वादा जुमले में बदल गया।