सोरोंजी। भगवान वराह की भूमि सोरोंजी को मोक्ष के लिए पुराणों में उत्तम स्थान बताया है। इसी मान्यता के चलते देश के कई प्रांतों के श्रद्धालु यहां गंगास्नान, तर्पण और अस्थि विसर्जन के लिए पहुंचते हैं। देश की कई नामचीन हस्तियों की अस्थियां हरि की पौड़ी में विसर्जित हुई हैं। पहले भी विदेशी मूल के दिवंगत लोगों की अस्थियां यहां विसर्जित हुई हैं। इसी महत्व के चलते शनिवार को तीर्थनगरी में हरि की पौड़ी पर रूसी युवक ने अपने दिवंगत पिता की अस्थियां विसर्जित कर मोक्ष की कामना की।रसियन युवक बिलाजिसलाब यूराव राज्य के येकेचिरयन बुर्ग शहर के निवासी हैं। वह अपने भाई अलेकजेंडर व दोस्त भागवत के साथ शनिवार सुबह तीर्थनगरी आए। वह अपने दिवंगत पिता विजयलास की अस्थि विसर्जन करने के लिए आए थे। हरि की पौड़ी के घाट पर तीर्थ पुरोहित पंडित गोपाल भारद्वाज व आचार्य कैलाश उपाध्याय ने विधि विधान पूर्वक वैदिक मंत्रोच्चार कर अस्थि विसर्जन व पिंडदान कार्यक्रम संपन्न कराया। इसके बाद गंगा स्नान कर उन्होंने वराह भगवान के दर्शन किए। बिलाजिसलाब को उनके गुरु ने बैकुंठदास नाम दिया है उन्होंने बताया कि उनकी सनातन धर्म में विशेष आस्था है। उनका 8-10 साल से वृंदावन आना-जाना लगा रहता है। 9 जुलाई को पिता विजयलास का वृंदावन में निधन होने के पश्चात हिंदू रीति-रिवाज से ही उनका वहीं दाह संस्कार किया था। इससे पूर्व पांच साल पहले भी वह सोरोंजी पर्यटन भ्रमण पर आए थे, यहां के विद्वान तीर्थपुरोहित पंडित गोपाल भारद्वाज ने उनको सोरोंजी हरि की पौड़ी में अस्थि विसर्जन के महत्व के बारे बताया था। जिससे प्रभावित होकर वह पिता का अस्थि विसर्जन करने यहां आए।