स्ट्रीट लाइट घोटाले की जांच में नियम-कानून ताक पर
- पंचायती राज अधिनियम की धारा 27 भूला विभाग
- ग्राम पंचायत में दुरुपयोगित धनराशि की वसूली का है प्रावधान
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। ग्राम पंचायतों का कानून किसी अधिकारी के मन से नहीं बल्कि पंचायत राज अधिनियम से चलता है। पंचायती राज अधिनियम की धारा 27 की उपधारा 2 में ग्राम पंचायत में दुरुपयोगित धनराशि का प्रावधान है। लेकिन पंचायत राज विभाग शायद ये धारा भूल गया है। तभी तो अब तक स्ट्रीट लाइट घोटाले में वसूली का आदेश जारी नहीं किया जा सका है।
जिले में कुल 549 ग्राम पंचायतें हैं। इन ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए प्रधान और सचिव को वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां दी गई हैं। वहीं इन ग्राम पंचायतों मेें होने वाले कार्य के पर्यवेक्षण के लिए जिला पंचायत राज विभाग का गठन किया गया है। ब्लॉक स्तर पर सहायक विकास अधिकारी पंचायत और जिला स्तर पर जिला पंचायत राज अधिकारी की तैनाती की गई है। साथ ही उन्हें ग्राम पंचायतों में कराए जाने वाले कार्य या कार्रवाई के संबंध में कोई परेशानी न हो इसके लिए पंचायती राज अधिनियम बनाया गया है।
लेकिन इन दिनों पंचायत राज विभाग के अधिकारी पर्यवेक्षण तो भूल ही गए है, अधिनियम भी उन्हें याद नहीं आ रहा है। तभी तो सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में इतना बड़ा स्ट्रीट लाइट घोटाला होने के बाद भी सरकारी धनराशि की वसूली की प्रक्रिया अब तक आरंभ नहीं की गई है।
करोड़ों की धनराशि का हुआ है दुरुपयोग
सात करोड़ रुपये के करीब धनराशि की ग्राम पंचायतों में लाइटें लगवाई गई हैं। इसमें से तीन करोड़ के करीब धनराशि का बंदरबांट किया गया है। ये लाइटें लोकल कंपनी की हैं। भुगतान के सापेक्ष इनकी कीमत आधी भी नहीं है। वहीं शासनादेश में वर्णित कंपनियों से इतर कंपनी की लाइटें लगवाना गबन साबित करने के लिए पर्याप्त है। पंचायत राज विभाग के पास भी इसकी पूरी जानकारी है, लेकिन अधिकारी हैं कि घोटाले में कार्रवाई के बजाए उसे दबाने में जुटे हुए हैं।
वर्जन
पूर्व में आई जांच स्पष्ट नहीं है, इसी के कारण कार्रवाई करने में समस्या आ रही है। प्रयास किया जाएगा कि जांच कमेटी बनाकर एक बार फिर से जांच कराई जाए।
-तुलसीराम विश्वकर्मा, डीपीआरओ