आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने बताया कि उन्होंने 18 जिलों में वर्ष 2020 में जनवरी से दिसंबर तक लापता बच्चों और बरामद बच्चों की जानकारी पुलिस विभाग से मांगी थी। 17 जिलों से यह सूचना उपलब्ध करा दी गई, लेकिन आगरा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
यह मांगी जा रही सूचना
आगरा के थानों में बड़ी संख्या में सीज की गई गाड़ियां खड़ी हैं। इनकी संख्या कितनी है। रजिस्ट्रेशन नंबर, चेसिस और इंजन नंबर क्या हैं। बहू ने परिवार परामर्श केंद्र में शिकायत की है। उसकी काउंसिलिंग में क्या हुआ, उसने क्या आरोप लगाएं, इसकी क्या रिपोर्ट दी गई। थानेदार की पोस्टिंग कब हुई थी, उन्होंने कब-कब छुट्टी ली है। अब तक किन थानों में पोस्ट रह चुके हैं। थाने में एक सिपाही तीन साल से तैनात है। इतने दिनों से उसके एक ही थाने में रुके रहने के पीछे क्या कारण है, उसके खिलाफ कोई शिकायत है या नहीं।
पांच साल में सूचनाएं मांगने वालों की संख्या
वर्ष - संख्या
2017 - 2833
2018 - 2186
2019 - 2080
2020 - 1450
2021 - 1300
दस रुपये करने होते हैं खर्च
आगरा। लोग थाने और अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काटने के बजाय सूचना के अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। सूचना मांगने के लिए दस रुपये का पोस्टल आर्डर लगाना होता है। इसके अलावा डीडी भी दिया जा सकता है। एक महीने के अंदर सूचना उपलब्ध कराई जाती है। सूचना देने के लिए कुछ नियम भी हैं। किसी केस के वादी को सूचना मिल जाती है, जबकि प्रतिवादी को सूचना उपलब्ध कराने का नियम नहीं है।
नियमानुसार दे रहे जानकारी
सूचना के अधिकार के तहत लोगों को सूचना उपलब्ध कराई जाती हैं। लोग केस की प्रगति से लेकर थानेदार और सिपाही की पोस्टिंग तक की जानकारी ले रहे हैं। किसी केस के प्रतिवादी भी सूचना मांगते हैं। इसके लिए विभाग में एक सेल बनी है। सूचना के लिए आवेदन करने पर नियमानुसार जानकारी दी जाती है।
- मुनिराज जी., एसएसपी
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