कासगंज। लंबे इंतजार के बाद बुधवार को हुई बारिश से धान के किसानों में खुशी हैं। उन्होंने धान की रोपाई का कार्य तेज कर दिया है। बारिश से पूर्व मात्र 25 प्रतिशत धान की ही रोपाई जो सकी थी, जबकि जनपद में लगभग 16000 हेक्टेअर में धान की खेती होती है।
जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के प्रथम सप्ताह तक धान की रोपाई के लिए समय काफी अच्छा माना जाता है। इस समय मानसून भी सक्रिय हो जाता है। लेकिन इस बार मानसून ने बेरुखी दिखाई। जुलाई के पखवाड़े तक सूखा रहा। हालांकि कुछ किसानों ने डीजल पंप सेटों से पानी की व्यवस्था कर धान की रोपाई कर ली, जिससे 25 फीसदी धान की रोपाई हो गई। लेकिन अधिकांश बारिश के इंतजार में थे। जब बुधवार को बारिश हुई तो किसानों में खुशी छा गईं। बृहस्पतिवार को हालांकि बारिश नहीं हुई, लेकिन बादल छाए रहे, जिससे धान की रोपाई के लिए किसानों को बेहतर समय मिल गया।
अभी तक नहीं हुई है देरी
धान की रोपाई के अभी बहुत देरी नहीं हुई। धान की रोपाई करने के बाद किसानों को खाद और सिंचाई समय से लगाते रहेंगे तो उत्पादन में अधिक असर नहीं पड़ेगा। यदि किसानों की नर्सरी तैयार हैं तो उन्हें धान की रोपाई कर देनी चाहिए। जिन्होंने डीजल पंप सेट के पानी से रोपाई कर ली हैं, उनके लिए भी बारिश लाभ देगी। - कोमल जादौन, कृषि विशेषज्ञ, केवीके।
किसानों की बात:
- बारिश न होने से लगातार धान की रोपाई पिछड़ रही थी। डीजल पंप सेट से पानी भरकर रोपाई करने से लागत काफी बढ़ जाती। बारिश होने से खेतों में पानी भर गया और अब तेजी से धान की रोपाई कर रहे हैं। - होतीलाल, किसान।
- धान की रोपाई के लिए बारिश होने का बेसब्री से इंतजार था। नर्सरी और खेत दोनों ही पहले से तैयार थे। बारिश होने के बाद रोपाई शुरू की है। कुछ दिन और बारिश न होती तो डीजल पंप सेट से पानी भरकर रोपाई करनी होती। - संतोष, किसान।
बारिश होने से धान की रोपाई का काम तेज हुआ है। किसानो की नर्सरी पहले से ही तैयार थी। रोपाई के लिए अभी बहुत देरी नहीं हुई हैं। वहीं बारिश खरीफ की अन्य फसलों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। हालांकि इस बार मानसून कुछ देरी से पहुंचा है। - सुमित कुमार चौहान, जिला कृषि अधिकारी।