जीएसटी फाइलिंग की लेट फीस आधी होने से व्यापारियों को राहत मिली है। जीएसटी काउंसिल की 49 वीं बैठक में लिए गए निर्णय से व्यापारी खुश हैं। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को भी व्यापारियों के हितों के लिए कर का सरलीकरण भी करना चाहिए।
अभी तक वयापारियों को जीएसटी फाइलिंग करने में लेट होने पर लेट फीस के रूप में प्रतिदिन सौ रुपये देने होते थे। जीएसटी काउंसिल की बैठक में लेट फीस को आधा किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि अगर करों का भी सरलीकरण कर दिया जाए तो व्यपार करने में सहूलियत होगी। जिले में जीएसटी जमा करने वाले 7500 व्यापारी पंजीकृत हैं। जिनमें छोटे बड़े व्यापारी शामिल हैं। छोटे और मझोले व्यापारी ही सबसे ज्यादा जीएसटी फाइलिंग करने में लेट होते हैं। जिनकी संख्या पांच से सात प्रतिशत होती है।
जीएसटी फाइलिंग में लेट होने पर लेट फीस कम होने से छोटे और मझोले व्यापारियों को राहत तो मिलेगी। लेट फीस को और कम किया जाना चाहिए। जिससे छोटे और मझोले व्यापारी सुगमता से अपना व्यापार कर सकें। - धीरु राठौर, जिलाध्यक्ष व्यापार मंडल
जीएसटी फाइलिंग की लेट फीस कम होने के साथ ही करों का सरलीकरण किया जाना चाहिए। छोटे व्यापारियों को अगर सुविधाएं दी जाएं तो उनका जहां व्यापार बढ़ेगा वहीं सरकार को मिलने वाला राजस्व भी बढ़ेगा। - घनश्याम दास गुप्ता, जिलाध्यक्ष पश्चिमी उद्योग व्यापार मंडल
जिले में जीएसटी में पंजीकृत 7500 व्यापारियों में से पांच से सात प्रतिशत ही जीएसटी फाइलिंग करने में लेट होते हैं। लेट फीस कम होने से इन व्यापारियों को राहत मिलेगी। अधिकांश व्यापारी समय से ही जीएसटी फाइलिंग करते हैं। - उमाशंकर विश्वकर्मा, डिप्टी कमिश्रर जीएसटी