माह ए रमजान का आखिरी जुमा यानी जुमा अलविदा सात मई को है। कोरोना कर्फ्यू के कारण मस्जिदों में चुनिंदा लोग ही नमाज अदा करने पहुंचेंगे। रोजेदार अपने घरों में ही जुमे की नमाज अदा करके मुल्क में खुशहाली को कोरोना से निजात दिलाने की दुआ करेंगे।
मुकद्दस रमजान में रोजेदार संक्रमण के इस दौर में घरों में रहकर इबादत कर रहे हैं। तीसरे अशरे के आखिरी जुमे को अलविदा का जुमा कहा जाता है। जुमा अलविदा के बाद ही ईद का त्योहार आता है। नायब काजी मोहम्मद उजैर आलम ने बताया कि अलविदा जुमा पर मस्जिदों में जमात के साथ नमाज अदा की जाती है, लेकिन इस बार कोरोना कर्फ्यू के कारण हालात जुदा हैं। ऐसे में रोजेदार अपने घरों में रहकर जुमे की नमाज अदा करें।
सर्वदलीय मुस्लिम एक्शन कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी जमीलउद्दीन कुरैशी ने जूम एप के माध्यम से मुस्लिम बुद्धिजीवियों से बातचीत में कहा है कि अलविदा जुमा पर लोग कोरोना गाइड लाइन का पालन करें। घरों में रहकर खुदा को राजी करें। यह भयावह दौैर चल रहा है। उत्तर प्रदेश मुस्लिम महापंचायत के सरपंच नदीम नूर ने कहा कि रमजान का पवित्र महीना हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाता है। इसलिए अनुशासित रहते हुए घरों में रहकर नमाज अदा करें। इस दौरान इरफान कुरैशी, यासीन सिद्दीकी, दाऊद इकबाल, हाजी युनुस, हाजी मुकीम, सईद अहमद, अंसार भाई, चौधरी मलिक आदि थे। जमीतुल कुरैश के जिलाध्यक्ष मोहम्मद शरीफ कुरैशी ने कहा है कि जुमे पर गाइड लाइन का पालन करें।