कासगंज। निर्वाचन आयोग ने सभी मतदाताओं को वोट डालने का अधिकार दिया है। मतदाता सामान्य के अलावा तीन अन्य प्रकार अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकता है। बस जरूरत है अपने इस अधिकार के बारे में जागरूक होने की। हम आपको बताने जा रहे हैं कि ये तीन प्रकार के वोट कौन से हैं और इनका प्रयोग कब और कैसे किया जा सकता है।मतदान के दिन अक्सर देखा जाता है कि किसी मतदाता के नाम पर कोई अन्य व्यक्ति ने वोट डाल दिया है। ऐसे में संबंधित मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो जाता है, लेकिन आयोग ने ऐसे मतदाताओं के लिए टेंडर वोट का प्रावधान किया है। बूथ पर बैठे पीठासीन अधिकारी से टेंडर वोट की मांग कर मतदान किया जा सकता है। यदि पोलिंग बूथ पर आपकी पहचान पर सवाल किया जा सकता है। इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। इसके लिए आयोग ने चैलेंज वोट की व्यवस्था की है। यदि आप सर्विस मतदाता हैं। सेना या अर्धसैनिक बल में तैनात हैं और बाहर रहते हैं तो आप अपने परिवार के किसी सदस्य को लिखित रूप से वोट डालने के लिए नामित कर सकते हैं। ऐसा वोट प्रॉक्सी कहलाता है।
इस तरह से पड़ता है टेंडर वोट :
अगर किसी मतदाता के नाम पर दूसरे व्यक्ति ने मतदान कर दिया है तो और उसका नाम मतदाता सूची में है तो वह शिकायत कर सकता है। पीठासीन अधिकारी संबंधित मतदाता से एक प्रपत्र पर मतदान करवाते हैं। इसके बाद मतपत्र को लिफाफे में बंद कर दिया जाता है। मतगणना के समय कम वोट के अंतर से हार-जीत की स्थिति में ऐसे वोट की गणना की जाती है। इसे टेंडर वोट कहते हैं।
इनको है प्रॉक्सी वोट डालने का अधिकार : अगर आप सर्विस मतदाता (सेना और अर्द्धसैनिक बल में हैं) हैं और चुनाव क्षेत्र से बाहर हैं तो परिवार के किसी सदस्य को अपना वोट डालने के लिए लिखित में नामित कर सकते हैं। पीठासीन अधिकारी लिखित प्रारूप की जांच करने के बाद नामित व्यक्ति को वोट डालने का मौका देगा। ऐसे मतदाता की दो अंगुलियों में अमिट स्याही लगाई जाएगी। प्रॉक्सी वोट के लिए मध्य अंगुली में, जबकि उसके खुद के मत के प्रयोग के लिए तर्जनी अंगुली में अमिट स्याही लगाई जाती है। हालांकि सर्विस मतदाता को पोस्टल बैलेट का भी अधिकार होता है।
पहचान पर सावल पर कर सकते हैं चैलेंज:
जब कोई मतदाता बूथ पर मतदान करने के लिए पहुंचता है और एजेंट या कोई व्यक्ति उसकी पहचान पर सवाल करता है कि संबंधित व्यक्ति क्षेत्र में नहीं रहता है, तो ऐसी स्थिति में संबंधित मतदाता उसे चैलेंज कर सकता है। खुद को सही साबित करने के लिए उसे पीठासीन अधिकारी से शिकायत करनी होगी। पीठासीन अधिकारी इसके लिए दो रुपये फीस जमा कराएगा। इसके बाद वह अपने स्तर से मामले की जांच करेंगे। यदि जांच में मामला सही पाया जाता है तो शिकायत करने वाला वोटर मतदान कर सकता है। यदि मामला झूठा मिला तो फर्जी मतदान करने के प्रयास के आरोप में संबंधित व्यक्ति को पुलिस को सौंपा जाएगा। ऐसे व्यक्ति पर केस दर्ज हो सकता है।