सरकार पर विपक्षी नेताओं की जासूसी के आरोप लगते रहे हैं। आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार ने विपक्षी दलों के नेताओं की जासूसी कराने में खुफिया एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल किया। इसकी कीमत इंदिरा को छठवीं लोकसभा के चुनाव में सत्ता खोकर चुकानी पड़ी। 1977 में प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने खुफिया एजेंसियों के राजनीतिक दलों की जासूसी में इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था।
अमर उजाला के 26 नवंबर, 1977 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, मोरारजी ने इंडियन फॉर डेमोक्रेसी नाम के संगठन के सदस्य नंदी के पत्र के जवाब में लिखे खत में कहा कि जनता पार्टी सरकार ने राजनीतिक और दलीय उद्देश्यों के लिए खुफिया एजेंसियों का प्रयोग औपचारिक रूप से खत्म कर दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि गुप्तचर कानून का राजनीतिक दलों के खिलाफ प्रयोग पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है।
भारत में खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली के बारे में उन्होंने लिखा कि उन्होंने इसके राजनीतिक इस्तेमाल पर सख्ती से पाबंदी लगा दी है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर इसका गलत इस्तेमाल किया।
इंडियन फॉर डेमोक्रेसी नाम का संगठन अमेरिका में प्रवासी भारतीयों का संगठन था, जिसने भारत में लागू इमरजेंसी के विरुद्ध अभियान चलाया था। इस संगठन ने विदेश में रहने वाले अलग-अलग मतावलंबियों का पासपोर्ट रद्द किए जाने का भी कड़ा विरोध किया था।
इंडियन फॉर डेमोक्रेसी ने प्रधानमंत्री देसाई को पत्र लिखकर मीसा, 42वें संविधान संशोधन को रद्द करने और अवसरवादी नेताओं के विरुद्ध कानून बनाने की भी मांग की थी। साथ ही इस संगठन ने आपातकाल के दौरान सत्ता के दुरुपयोग की जांच और विदेश में बसे भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार देने की भी अपील की थी।