उत्तर प्रदेश के आगरा में हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में प्रतिशत का घमासान बढ़ता जा रहा है। आईसीएसई, सीबीएसई, यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों की बुद्धिमानी का पैमाना अंकों की आंधियों में तलाशा जाने लगा है। बोर्ड परीक्षाओं में 90 से 98 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों का प्रतिशत भी साल दर साल बढ़ रहा है।
नंबर लाना सफलता का पैमाना नहीं
साथ ही ऐसे विद्यार्थियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है जो पढ़ाई में काफी तेज हैं, पर परीक्षा में उनके अंक कम आते हैं। जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल के प्राचार्य पुनीत वशिष्ठ कहते हैं कि 95 या उससे ऊपर प्रतिशत लाने वाले विद्यार्थियों की संख्या सिर्फ दो प्रतिशत है। यह भी पिछले कुछ सालों में बढ़ी है। इसलिए उन बच्चों को निराश नहीं होना चाहिए, जिनके प्रतिशत लक्ष्य से कम आए हैं। अधिक नंबर लाना जीवनभर की सफलता का पैमाना नहीं हो सकते।
स्कूल में मोटिवेशनल क्लास लगाई जाती है
श्रीरामकृष्ण इंटर कालेज के प्रबंध निदेशक सोमदेव सारस्वत कहते हैं कि परीक्षा परिणाम आने के बाद हर साल बच्चों के लिए स्कूल में मोटिवेशनल क्लास लगाई जाती है। इसके पीछे हमारा उद्देश्य उन बच्चों का उत्साहवर्धन करना रहता है, जो लक्ष्य से कम अंकों पर अटक जाते हैं। सारस्वत कहते हैं कि उनके स्कूल से निकले कई बच्चे हाईस्कूल में द्वितीय श्रेणी में पास हुए। लेकिन, आज सरकारी नौकरियों मे ऊंचे पदों पर तैनात हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. यूसी गर्ग के टिप्स-
- अभिभावक बच्चे को समझाएं कि जीवन में अगली उछाल के लिए मेहनत करें, अफसोस नहीं। 80 और 90 का स्टेटस लगभग एक जैसा है। सिर्फ अंकों की दूरी है।
- हमें बच्चों को इस बात का एहसास कराते रहें कि तुम अच्छा कर सकते हो।
- कम प्रतिशत लाने वाले विद्यार्थियों के प्रति काफी शिक्षकों का रवैया बदल जाता है, ऐसा बिल्कुल नहीं करें।
- शिक्षक और अभिभावक तुम कर सकते हो का भाव लगातार छात्र में डालते रहें।
- स्कूल में शिक्षकों का रवैया एकदम बदल जाता है, ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
- बच्चे की पढ़ाई के तरीके पर अभिभावक और शिक्षक को पूरा ध्यान देना चाहिए।
- बच्चों को हमेशा यह समझाना चाहिए कि अंकों का मापदंड होशियारी नहीं हो सकता।
- शारीरिक व्यायाम के प्रति भी बच्चों को हमेशा प्रेरित करें।