लोकसभा चुनावों के दौरान किए गए वादों से नेताओं ने मतदाताओं को लुभाया। वादे करने वाले नेता चुनाव में हारे और जीते मगर वादा निभाने की कोशिश कभी नहीं की। जिले के विकास के लिए प्रत्याशियों द्वारा किए गए वादे आज तक पूरे नहीं हो सके।
विकास के क्षेत्र में पिछड़े जिले को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए वादे तो तमाम किए लेकिन चुने गए सांसदों ने सार्थक पहल नहीं की। ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे मतदाता नेताओं के वादों पर भरोसा कर सकें। मैनपुरी जिला औद्योगिक विकास में पिछड़ा हुआ है। जिले के युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए नेताओं ने वादे तो किए लेकिन चुनाव जीतने के बाद उन वादों को पूरा कराने की दिशा में काम नहीं किया गया। मतदाताओं ने नेताओं को उनके वादों पर भरोसा करके संसद तक पहुंचाया लेकिन नेताओं ने अपने वादों को पूरा करने की पहल नहीं की। यही बजह है कि जिले को आज तक वादों के मुताबिक कोई सौगात चुने हुए सांसदों से नहीं मिल सकी।
वादा-एक-चीनी मिल
वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी केसी यादव के सर्मथन में घिरोर क्षेत्र में जनसभा हुई। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने केंद्र में सरकार बनने पर मैनपुरी में चीनी मिल लगवाने का वादा किया। केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार बनी पर चीनी मिल का वादा अधूरा रहा।
वादा-दो- आलू आधारित उद्योग
वर्ष 1991 के चुनाव में जनता दल केे प्रत्याशी उदय प्रताप सिंह ने जिले में आलू आधारित उद्योग लगवाने का वादा किया। केंद्र में गैर कांग्रेसी सरकार बनी। उदय प्रताप संासद चुने गए। लेकिन उन्होंने अपने दो कार्यकाल आलू आधारित उद्योग लगवाने की दिशा में सार्थक पहल नहीं की।
वादा-तीन-रेलवे का विस्तारीकरण
वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव ने रेल सुविधाओं के विस्तारीकरण का वादा किया। वह पांच बार सांसद चुने गए। मुलायम सिंह के जीतने के बाद मैनपुरी से इटावा तक रेलवे लाइन तो बन गई। मगर रेल सुविधाओं का आज तक विस्तारीकरण नहीं हो सका।