मैनपुरी। प्रदेश की तीन जेल के बंदी अब मैनपुरी कारागार में बंदियों द्वारा उगाए गए कद्दू का स्वाद चखेंगे। सोमवार को जेल परिसर में उगाए गए करीब 100 कुंतल काशीफल को आगरा केंद्रीय कारागार, मुरादाबाद और लखनऊ जेल भेजा गया है।जिला कारागार में बंदियों द्वारा कुशल खेती का ही नतीजा है कि बीते डेढ़ साल में करीब 1300 कुंतल सब्जियां प्रदेश की विभिन्न जेलों में सप्लाई की जा चुकीं हैं। जेलर पवन कुमार त्रिवेदी के निर्देशन में बंदी बेहतर उत्पादन आदि के तरीके सीख चुके हैं। करीब डेढ़ साल से जेल परिसर के अंदर ही खेती की शुरुआत हुई। इसमें जेल अधिकारियों का निर्देशन और बंदियों के श्रमदान से आज मैनपुरी जेल प्रदेश की कई जेल में सब्जियां भेजने का काम करती है। अब तक भिंड़ी, तोरई, कटहल, खीरा, ककड़ी सहित करीब 1300 कुंतल सब्जियां विभिन्न जेलों में भेजी जा चुकी है। जेलर ने बताया कि बंदियों की मेहनत से इस बार कद्दू (काशीफल) की बेहद अच्छी पैदावार हुई। सोमवार को तीन वाहनों से आगरा केंद्रीय कारागार, लखनऊ और मुरादाबाद की जेल में करीब 100 कुंतल काशीफल भेजा गया है। जेल में कृषि योग्य भूमि में आम के भी कई पेड़ लगे हुए हैं। इसकेे अलावा मैनपुरी जेल के बंदी कई अन्य सब्जियों के सहज व सरल उत्पादन को लेकर गुर सीख रहे हैं। फिलहाल को प्रदेश की तीन जेल के बंदी मैनपुरी जेल में उगाए गए काशीफल का स्वाद चखेंगे।
बदल रही है जेल की सूरत
जेल में बंदियों को भेजे जाने का मकसद आमतौर पर सजा के तौर पर ही देखा जाता है। लेकिन जिला कारागार मैनपुरी में बंदियों के सुधार को लेकर भी कार्य किए जा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि कंप्यूटर प्रशिक्षण, महिलाओं के लिए सिलाई कढ़ाई आदि प्रशिक्षण के साथ ही रेडियो जॉकी आदि की व्यवस्था भी है। इसके साथ ही अपने बेहतर चाल चलन के चलते कई बंदी जेल में सम्मान पा रहे हैं।