33 पुलिसकर्मी पाए गए दोषी
आयोग ने इसकी जांच पहले अपर पुलिस महानिदेशक आगरा के माध्यम से मथुरा और आगरा पुलिस से कराई। आयोग इस जांच से संतुष्ट नहीं हुआ तो मुख्यालय पुलिस महानिदेशक ने विशेष जांच कराई। यह जांच रिपोर्ट 27 जनवरी 2022 को सहायक निदेशक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग लखनऊ व डीजीपी लखनऊ को भेजी गई। इसमें 33 पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए कहा गया।
पुलिस ने लगाया पॉक्सो एक्ट
सुमित ने बताया कि जब दोषी पुलिसकर्मियों को अपने खिलाफ होने वाली दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी हुई तो वह समझौते का दबाव बनाने लगे। समझौते से इनकार करने पर उसे, उसके भाई दीपेंद्र कुमार, मां माया देवी को पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म के मामले में फंसा दिया।
ये दोषी पाए गए
अपर पुलिस अधीक्षक राजेश सोनकर, सीओ आलोक दुबे, सीओ प्रीति सिंह, सीओ विजय शंकर मिश्रा, निरीक्षक शिव प्रताप सिंह, रामपाल सिंह, निरीक्षक हरवीर मिश्रा, अवधेश त्रिपाठी, नितिन कसाना, उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार, अनिल कुमार, राजवीर सिंह, धर्मवीर कर्दम, रामफूल शर्मा, सुल्तान सिंह, प्रदीप कुमार, विपिन भाटी, हेड कांस्टेबल नरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, कांस्टेबल सुरेंद्र कुमार, विशाल गौतम, अवनीश कुमार, अभिजीत कुमार, रोहित जनमेदा, लोकेश कुमार भाटी, वसीम अकरम, नितित कुमार, आर्यन दुबे, हरवीर सिंह, गौतम प्रताप सिंह, तत्कालीन सुदेश कुमार व दो अन्य शामिल हैं।