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Agra: जोंस मिल प्रकरण में 50 से अधिक लोगों के बयान दर्ज, फिर भी 17 महीने में नहीं लग सकी चार्जशीट

Wed, 23 Nov 2022 06:38 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

बिल्डर के परिवार की महिला के प्रार्थना पत्र पर मई 2021 में शासन ने विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को स्थानांतरित कर दी गई। तब से विवेचना चल रही है। 17 महीने में पुलिस चार्जशीट नहीं दाखिल कर पाई है। 
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जोंस मिल प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में जोंस मिल जमीन खुर्दबुर्द मामले की विवेचना 17 महीने बाद भी अधूरी है। आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने केस से संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए थे। वर्तमान और तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों सहित 50 से अधिक के बयान दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद केस में चार्जशीट नहीं लग सकी है। आगरा के सबसे बडे़ जमीन घोटाले की पड़ताल में देरी से कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

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19 जुलाई 2020 को जोंस मिल की जमीन पर बम धमाका हुआ था। इससे यह जमीन सुर्खियों में आई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। विवेचना हुई। इसमें मुख्य आरोपी मैना गेट, पथवारी निवासी रज्जो जैन को बनाया गया। अन्य सहयोगी भी पकड़े गए। मुख्य आरोपी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई हुई। करोड़ों की संपत्ति का जब्तीकरण हुआ। एक और केस रज्जो जैन, सरदार कंवलदीप सिंह और बिल्डर हेमेंद्र अग्रवाल उर्फ चुनमुन के खिलाफ दर्ज हुआ।

यह मुकदमा जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट के बाद लेखपाल ने दर्ज कराया। इसमें जोंस मिल की जमीन को खुर्दबुर्द करने के आरोप लगाए गए। पुलिस ने आरोपी बिल्डर को जेल भेजा था। अन्य आरोपियों को कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। पुलिस की विवेचना शुरू हुई। बिल्डर के परिवार की महिला के प्रार्थना पत्र पर मई 2021 में शासन ने विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को स्थानांतरित कर दी गई। तब से विवेचना चल रही है।

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50 से अधिक लोगों के बयान दर्ज 

आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा की टीम ने केस से संबंधित दस्तावेज कब्जे में ले लिए थे। इसके बाद केस से संबंधित कई लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजे गए थे। केस के विवेचक निरीक्षक शिव कुमार ने बताया कि मुकदमे की विवेचना की जा रही है। 50 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें पुलिस प्रशासन के अधिकारी से लेकर आरोपी सहित अन्य लोग शामिल हैं। तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारियों के भी बयान लिए हैं। साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। अभी चार्जशीट लगाया जाना बाकी है। 20 से अधिक के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। 

पुलिस की लापरवाही आई थी सामने

जोंस मिल प्रकरण में बम धमाके के मामले से लेकर जमीन को खुर्द बुर्द करने तक में पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। बम धमाके के मुकदमे में पहले विवेचक ने केस में बिल्डर चुनमुन का नाम बढ़ाया था। आरोप था कि वह साजिश में शामिल रहा। बाद में विधिक राय के आधार पर नाम निकाल दिया था। 

विवेचक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई थी। जांच हुई। बाद में जमीन खुर्दबुर्द करने के मामले में बिल्डर चुनमुन को हरिद्वार से पकड़ा गया। जेल भेजा गया। रज्जो जैन और सरदार कंवलदीप सिंह की गिरफ्तारी के दबिश का दावा किया गया। उनको अग्रिम जमानत कोर्ट से मिल गई। बाद में विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में स्थानांतरित हो गई।

कलेक्ट्रेट से जुटाए गए थे साक्ष्य

ईओडब्ल्यू की टीम कई बार कलेक्ट्रेट आ चुकी है। इसमें जमीन मामले से संबंधित दस्तावेज जुटाए गए थे। घटनास्थल का निरीक्षण भी किया गया था। टीम ने आरोपियों से पूछताछ की थी। सूत्रों ने बताया कि सामने आया था कि सरकारी जमीन को बेचा गया। यमुना डूब क्षेत्र की जमीन को भी बेचा गया। इन सब तथ्यों को चार्जशीट में शामिल किया जा रहा है।
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